कुरुक्षेत्र 25 अप्रैल । सहायक गन्ना विकास अधिकारी डा. बलजिन्द्र सिंह ने दी किसानों को गन्ना बिजाई के बारे जानकारी, फसल अवशेषों में नहीं लगानी चाहिए आगकिसानों को अधिक आय अर्जित करने के लिए उन्नत किस्म के गन्ने के बीज का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही नई तकनीकी से गन्ने की बुआई भी करनी चाहिए।
सहायक गन्ना विकास अधिकारी डा.बलजिन्द्र सिंह शुक्रवार को शाहबाद के विभिन्न गांवों में किसानों को जानकारी दे रहे थे। इससे पहले डा. बलजिन्द्र सिंह ने गांव खरींडवा, यारी, त्यौरा, गुमटी, रावा इत्यादि गांवों में जाकर गन्ने की नई तकनीक, किस्मों, कीडे व बीमारियों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने किसानों को अन्य फसलों की जगह विभिन्न विधियों से गन्ना बुआई सी.ओ. 15023, चौड़ा खुड विधि के माध्यम से गन्ना बिजाई, सिंगल बड़ विधि से बुआई व एम.एच.ए.टी.नर्सरी कराने के विषय को लेकर किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि किसानों को बीज उपचार के लिए बुआई से पहले गन्ने की पोरियों को मैंकोजेब या कार्बेन्डाजिम का 0.25 प्रतिशत 5 मिनट तक उपचार करने के लिए बताया गया ताकि कम लागत में अधिक पैदावार ली जा सके। गेंहु कटाई के बाद गन्ना बिजाई कर रहे किसानों को प्रति एकड़ 35 किलोग्राम म्युरेट ऑफ पोटाश, 50 किलोग्राम डी.ए.पी., 50 किलोग्राम यूरिया व 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट बिजाई के समय खेत में डालने की अनुशंसा की गई। खरपतवार की रोकथाम के लिए 1 किलोग्राम सल्फटजऊजोन 28 प्रतिशत व क्लोमाजोन 30 प्रतिशत को 200 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के तुरंत बाद उचित नमी में छिडक़ाव करें। मौथाघास की रोकथाम के लिए सैंपरा का 36 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के 35 से 45 दिन बाद जब मौथा घास 3 से 5 पति का हो तभ फ्लैट फैन नोजल से छिडक़ाव करें। रेटून फसल प्रबंधन के लिए 65 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ अप्रैल माह के अंत तक डालकर पानी से सिंचाई करें इसके साथ-साथ किसानों को गेहूं के अवशेषों में आग न लगाकर उनका उचित प्रबंधन बारे विस्तार से जानकारी दी।
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