कुरुक्षेत्र, 18 दिसंबर (एस) जींद के भाई-बहन की जोड़ी (रेणू दूहन व पवनराज) ने अपना जीवन हरियाणवी संस्कृति को समर्पित कर दिया है। इन दिनों ये अपने ग्रुप के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में हरियाणवी संस्कृति के अनूठे रंग बिखेर रहे हैं। पुरुषोत्तमबागपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इनकी मुख्य रुप से प्रस्तुतियां दी जा रही हैं।
रेणू दूहन ने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर अकादमी का गठन किया है,
महोत्सव में आने वाली महिलाओं को भा रहे है सिल्क के कपड़े से बने पर्स
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में आने वाली महिलाओं को सिल्क के कपड़े और खादी से बने पर्स खुब भा रहे है और महिलाएं इन पर्सो की जमकर खरीददारी कर रही है। पंजाब के गुरदासपुर से आई संदीप ने बताया कि वह महोत्सव में हर वर्ष खादी व शिल्क कपडे सेे बने लेडिज पर्स लेकर आती है। इस लेडिज पर्स को वह सूती धागे से तैयार करती है और इसे तैयार करने में कम से 20 से 40 मिनट लगते है। इन लेडिज पर्सो की डिजाईनिंग बहुत ही सुंदर होती है जिसे वह अपने हाथों से बिना किसी मशीन की सहायता से तैयार करती है।
महाराष्ट की कौल्हापुरी की चप्पल के मुरीद हुए पर्यटक
महोत्सव में आने वाले पर्यटकों के कदम महाराष्टï्र की कौल्हापुरी चप्पल की देखने में बहुत ही सुंदर लगती है और सभी को अपनी और आकर्षित करती है। महाराष्ट्र के कौल्हापुर से आए सरजेरा सातपुते ने बताया कि वह अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में कई वषों से आ रहा है और वह इस महोत्सव में महाराष्ट्र कौल्हापुर की विख्यात कौल्हापुरी चप्पल इस मेले में लेकर आया है।
उन्होंने बताया कि इस चप्पल का नाम कौल्हापुर राज्य के नाम पर ही पड़ा है, महाराष्टï्र में इस चप्पल को लोग खुब पंसद करते ही है |
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