कुरुक्षेत्र 19 दिसंबर पर्यटक गरमा-गर्म काहवा पीकर कश्मीर की सर्द वादियों की यादों में खो जाते है, इस महोत्सव में चाहवान पर्यटकों के लिए पिछले 8 सालों से गुलिस्तान सेल्फ हेल्प ग्रुप से महजबीन और जावेद कश्मीर से पहुंच रहे है और हर बार पर्यटकों की मांग को पूरा करने के लिए कश्मीर का काहवा लेकर आते है। कश्मीर की बारामुला निवासी महजबीन व जावेद का कहना है कि वर्ष 2011 से अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में आ रहे है और यहां पहुंच कर उन्हें अपनापन महसुस होता है। हर वर्ष अपने पूरे परिवार के साथ यहां आते है। कश्मीर में गुलिस्तान सेल्फ हेल्प ग्रुप भी चला रहे है। इस हेल्प ग्रुप के साथ 10 से 20 ग्रुप बनाए हुए है और 200 से 300 लोग उनके साथ मिलकर रोजगार कर रहे है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में जब हालात ठीक रहते है तो सालाना 3 लाख रुपए कमा लेते है और जब हालात ठीक नहीं रहते तो उनकी आमदन आधी रह जाती है। हालांकि उनके गांव में उग्रवाद का कोई ज्यादा प्रभाव नहीं है, कुछ ही क्षेत्र में तनाव की स्थिति रहती है। ऐसे में कुरुक्षेत्र महोत्सव का बेसब्री से इंतजार करते है। यहां पर आकर लोगों से मिलना बहुत अच्छा लगता है। यहां पर प्रशासन की तरफ से हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
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