कुरुक्षेत्र 20 दिसम्बर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में हाथ से बनी पेंटिग ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस पेंटिंग को कपड़े पर बनाया जाता है और इस पेंटिंग की विशेषता है कि यह रात के समय में लाईट की रोशनी की तरह चमक देती है जो कि घरों की दिवारों पर लगी हुई बहुत ही सुंदर लगती है।
राजस्थान से आए पुष्पिन्द्र ने स्टाल नम्बर 33 पर बातचीत करते हुए बताया कि वह तथा उनका पूरा परिवार इस तरह की पेंटिंग तैयार करता है जो कि अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के साथ-साथ अन्य मेलों में भी प्रर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह पेंटिंग ब्लू कपडे पर बनाई जाती है और इस पेंटिंग को बनाने के लिए कम से कम 5 से 6 घंटे लगते है। उनका पूरा परिवार अपने हाथों से इस पेंटिंग को बनाता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता हंसराज साऊ व उनके भाई को इस पेंटिंग के जिलास्तरीय आवार्ड भी मिला है। वे राजस्थानी पेंटिंग, राधा कृष्ण की पेंटिंग, खुजराव, मॉर्डन पेंटिंग और अन्य तरह की पेंटिंग इस महोत्सव में लेकर आएं है जिसे पर्यटक और स्थानीय लोग इसकी जमकर खरीददारी कर रहे है। वे पूरी मेहनत से इस पेंटिंग को अनोखा रूप देते है जिसे देखकर पर्यटक हैरान हो जाते है इस तरह की कारीगरी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के मन को मोह रही है। इन पेंटिंग की कीमत 150 रुपए से लेकर 35 हजार रुपए तक रखी गई है।
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