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मानव जन्म से नहीं कर्म से महान् बनता है: आचार्य देवव्रत

कुरुक्षेत्र, 23 दिसम्बर 2018: गुरुकुल कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानन्द के 92वें बलिदान दिवस पर जेनेसिस क्लॉसिज द्वारा पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया जिसमें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल व गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जन्म से नहीं बल्कि सुकर्मों से महान बनता है। स्वामी श्रद्धानन्द इसके प्रत्यक्ष प्रमाण है। स्वामी श्रद्धानन्द ने स्वराज्य प्राप्त करने, देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त करने, दलितोद्धार व पश्चिमी शिक्षा की जगह वैदिक शिक्षा प्रणाली लागू कर महान कार्य किए। हमें उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धाजंलि होगी। उन्होंने एनडीए में लेफ्टिनेंट पद पर सेलेक्ट हुए गुरुकुल के 5 विद्यार्थियों सहित लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 17 छात्रों को भी सम्मानित किया, वहीं जिनेसिस क्लासिज द्वारा राज्यपाल आचार्य देवव्रत को स्वामी दयानन्द का स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी, निदेशक व प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता, डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार, राधाकृष्ण आर्य, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, जिनेसिस क्लासिज के जितेन्द्र अहलावत, प्रकाश जोशी, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य सहित भारी संख्या में अभिभावकगण उपस्थित रहे।
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि आज के प्रतियोगिता के युग में विद्यार्थी परिश्रम व योग्यता के बल पर अपनी एक अलग पहचान बनाएं, ताकि उन्हें जीवन में उच्च मुकाम हासिल हो। जिस विद्यार्थी में परिश्रम व जज्बे की भावना की प्रबल होती है उसे जीवन में सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने कहा कि अभावग्रस्त विद्यार्थी लगन व परिश्रम के द्वारा जीवन में स्वाभिमान व इच्छाशक्ति के बल पर आगे बढ़ सकता है इसलिए जीवन में हमें कभी भी हताश नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनेसिस क्लॉसिज ने गुरुकुल के विद्यार्थियों की दिशा बदल दी है जिसके कारण गुरुकुल के विद्यार्थी हर प्रतियोगी परीक्षाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। आज गुरुकुल के विद्यार्थी अपने सुसंस्कारों को समृद्ध कर देश, राज्य, जिला व अपने अभिभावकों का नाम रोशन कर रहे हैं, गुरुकुल के 17 बच्चों ने एनडीए, 7 बच्चों ने आईआईटी तथा 2 बच्चों ने पीआईएमटी की परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रचा है।
 गुरुकुल के निदेशक व प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता ने कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द स्वतंत्रता सेनानी व महान शिक्षाविद् थे। जब उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती का सत्संग सुना तो उनके जीवन की दिशा बदल गई इससे पता चलता है कि श्रद्धा व विश्वास से सुना गया सत्संग किस प्रकार से नास्तिक को आस्तिक व व्यभिचारी को सदाचारी बना देता है। वे सच्चे अर्थों में एक तपस्वी व निष्काम कर्मयोगी थे जो भोगी से योगी बने और राष्ट्र की सेवा के लिए तिल-तिल कर जले। उन्होंने देश व समाज को जो कुछ दिया वह चिरकाल तक विश्व को मार्गदर्शित करता रहेगा। कर्नल दत्ता ने गुरुकुल द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न प्रकल्पों की संक्षिप्त जानकारी भी प्रस्तुत की। अन्त में जेनेसिस क्लॉसिज की ओर से प्रतिभा खोज परीक्षा, एनडीए, एनईईटी, आईआईटी, आईआईएसईआर, केवीपीवाई, आईआईएमएस व जेईई मेन्स एवं एडवांस के प्रतिभावान छात्रों को पारितोषिक व नगद राशि के चैक प्रदान कर सम्मानित भी किया।

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