कुरुक्षेत्र 29 जनवरी : ‘महावीर जब नाम सुनावे भूत-पिशाच निकट न आवे’ यह भजन पश्चिचममुखी सिद्ध हनुमान मंदिर में महंत ओमप्रकाश ने भक्तों को सुनाया। उन्होंने कहा कि जो भक्त सच्चे मन से बजरंग बली का गुणगान करते हैं उन्हें किसी प्रकार का कष्ट नहीं रहता और उनका जीवन खुशियों से भर जाता है। इसीलिए हनुमान जी को संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। बजरंग बली को खुश करना बहुत कठिन है,लेकिन राम भक्तों के लिए यह अति सुगम है। क्योंकि जहां राम नाम की कथा चलती हो और जो भक्त राम का नाम जपता हो वह ही इनको प्रिय है। बजरंग बली कभी भी अपना गुणगान नहीं चाहते वह तो अपने स्वामी श्रीराम का नाम लेने वाले के सभी कार्यों को पलभर में सुगम बना देते हैं। महंत ओमप्रकाश ने बताया कि यह पश्चिचममुखी सिद्ध हनुमान मंदिर 700 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है जिसे राजपूत राजाओं ने बनवाया था। इस मंदिर में हनुमान जी को जो भी भक्त सिंदुर का चोला चढ़ाता है तथा मन्नत मांगता है उसकी हर सात्विक मांग को हनुमान जी अवश्य पूरी करते हैं। इसके बाद सभी राम भक्तों ने हनुमान जी की आरती की तथा मूर्ति को लड्डूओं का भोग लगाया। इस मौके पर पंडित नीलकंठ ने सुंदरकाण्ड का पाठ किया।
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