करनाल 16 फरवरी, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से एडीआर के सभागार में शनिवार को लिविंग इन दा शैडो, प्रोजेक्ट के तहत एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सीजेएम एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव हितेश गर्ग ने की।
इस अवसर पर सीजेएम हितेश गर्ग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कोई भी बिना लाईसेंस के तेजाब की बिक्री नहीं कर सकता, अगर कोई ऐसा करते पाया जाता है तो उस पर कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तेजाब हमले से पीडितों की ना केवल सहायता करना, बल्कि उनको समाज की मुख्य धारा में शामिल करना है। अगर किसी पर भी तेजाब हमला होता है तो महिला एंव बाल विकास विभाग की ओर से 15 दिन के अंदर-अंदर एक लाख रूपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है, इसके साथ-साथ सरकार से मान्यता प्राप्त हस्पतालो में पीडि़त का निशुल्क ईलाज का भी प्रावधान है।
कार्यशाला में विशेष रूप से प्राधिकरण की सदस्य एवं तपन पुर्नवास केन्द्र की निदेशक सुजाता, पैनल एडवोकेट मीनी मेहत्ता, महिला एवं बाल विकास की सुपरवाईजर संतोष ने शिरकत की। कार्यशाला में सभी वक्ताओं ने तेजाब हमले के पीडितों के पुर्नवास एवं सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि के बारे में विस्तार े से जानकारी दी।
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