ढांड, 3 मार्च : हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि सभी एक दूसरे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। दूसरे के सुख-दुख में सांझीदार होने वाले दूसरों को आंसू पौंछने वाले तथा निस्वार्थ भाव से दूसरों के उपकार के कार्य करने वाले व्यक्तियों का जीवन वास्तव में सार्थक होता है। हमें सभ्य व सुसंस्कृत समाज के निर्माण के लिए बच्चों को अच्छे संस्कार देने होंगे तथा उन्हें हर प्रकार के नशे से दूर रखना होगा।
महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत स्थानीय अनंत राम फार्म पर हरिओम सेवा समिति ढांड द्वारा जीरो बजट प्राकृतिक खेती एवं नशा मुक्ति विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि उपस्थिगण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान हर प्राणी में विद्यमान है। हम प्राणी मात्र की सेवा करके भगवान को प्रसन्न कर सकते हैं। उन्होंने महान संत तुकाराम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने तीर्थ स्थान यात्रा के दौरान अपने घड़ों में भरे पवित्र जल को जंगल में प्यास से तड़प रहे गधे को पिलाना उचित समझा, जबकि उनके अन्य साथियों ने इस गधे को अनदेखा करके वे आगे बढ गए। संत तुकाराम ने अन्य संतों द्वारा पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने एक प्यासे प्राणी को पानी पिलाकर उसकी जान बचाई है और उन्होंने इस प्राणी में भगवान के दर्शन किए हैं। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें पीडि़त प्राणियों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।
आचार्य देवव्रत ने उपस्थितगण का आह्वान किया कि वे समाज में सामाजिक सदभाव को बढावा दें तथा अपने बच्चों को हर प्रकार के नशे से बचाकर रखें। उन्होंने कहा कि नशा बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर देता है। बच्चों को हर प्रकार के नशे से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। नशा एक ऐसी कुरीति है, जिसे समाज से पूरी तरह से समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहन-बेटियां समाज के लिए वरदान है तथा घर की शोभा है। बेटियां हमारा आदर्श हैं व देश का भविष्य हैं। हमें उन्हें पूरी शिक्षा, पूरा प्यार तथा आगे बढने के समान अवसर देने होंगे। उन्होंने कहा कि समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को जड़मूल समाप्त करें। आज शिक्षा के क्षेत्र में तो लड़कियां लड़कों से बहुत आगे हैं और अन्य क्षेत्रों में भी लड़कियां पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती ने उन दिनों नारी उत्थान व नारी शिक्षा के लिए कार्य किया तथा उत्तर भारत में महिलाओं के लिए जालंधर में पहली पाठशाला खुलवाई।
उन्होंने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि वे रासायनिक खेती से जहर युक्त खाद्यान उत्पन्न करके पाप कमा रहे हैं। रासायनिक खादों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोेग से कई गंभीर बीमारियां फैल रही हैं तथा भूमि भी बंजर हो रही है। समाज में अनेक असाध्य रोग फैल रहे हैं, जिनमें कैंसर, शुगर, हार्ट अटैक आदि शामिल हैं। सभी अस्पताल मरीजों से भरे हैं। यह सब रासायनिक खादों व कीटनाशकों का दुष्परिणाम है। उन्होंने कहा कि शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाकर हम इन सभी समस्याओं पर नियंत्रण पा सकते हैं। हम एक देसी गाय से30 एकड़ की खेती कर सकते हैं। इच्छुक किसान कुरुक्षेत्र गुरुकुल में इस खेती का अवलोकन कर सकते हैं तथा निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त का सकते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से खाद्यान शुद्घ होंगे, भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी, स्वास्थ्य ठीक होगा, गाय का संरक्षण होगा,पर्यावरण शुद्घ होगा तथा किसान की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल के अतिरिक्त उपायुक्त मेजर रोहन मुंशी, प्रैस सचिव जयंत, राधा कृष्ण आर्य समिति के प्रधान जितेंद्र पंवार, जंगशेर, पवन गर्ग, मुकेश धीमान, पंडित कविराज, निर्मल दहिया, पवन कसाना, अमर राविश, सुबे सिंह राविश सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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