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गायत्री मन्त्र सद्बुद्धि का मन्त्र है और मन्त्र में अद्भुत शक्ति है: ब्रह्मचारी

कुरुक्षेत्र 7 मार्च – अग्नि मंथन पूजन के साथ जयराम विद्यापीठ में देवी देवताओं का आहवान कर आलौकिक गायत्री पुरश्चरण अनुष्ठान तथा यज्ञ का शुभारम्भ हुआ। विद्यापीठ की मुख्य यज्ञशाला में भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी के सान्निध्य में 13 मार्च तक चलने वाले अनुष्ठान तथा यज्ञ के लिए सबसे पहले लक्ष्मी नारायण मंदिर में वेदों के महान ज्ञाता आचार्य मायाराम रतूड़ी, आचार्य रणबीर भारद्वाज, सह आचार्य राजेश लेखवार शास्त्री व सह आचार्य प्रदीप थपलियाल सहित 108 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सृष्टि के प्रथम आराधनीय श्री गणेश पूजन के उपरांत पंचांग पूजन तथा ब्राह्मण वरण किया गया। जयराम संस्थाओं के मीडिया प्रभारी राजेश सिंगला ने बताया इस के उपरांत लक्ष्मी नारायण मंदिर से विद्यापीठ की मुख्य यज्ञ शाला तक भव्य यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में गायत्री पुरश्चरण अनुष्ठान के यजमान देश के विख्यात कलकत्ता के उद्योगपति गिरधर गोपाल डालमिया, माता भगवती देवी, निर्मला डालमिया, मनीष डालमिया, विजय डालमिया, राधिका डालमिया, पुनिता डालमिया, सरोज बाई, सुधा बाई तथा पिंकी बाई पवित्र कलश व मंत्रोच्चारण से स्थापित पंचांग के साथ 101 ब्राह्मणों एवं ब्रह्मचारियों के साथ शामिल हुए। सिंगला ने बताया यज्ञ शाला में पवित्र कलश व स्थापित पंचांग स्थापित करने के उपरांत विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ मंडप प्रवेश हुआ और उसके बाद यज्ञ द्वार वेद पूजन, वास्तु पूजन व देवी देवताओं का आस्था के साथ आहवान किया गया।

इस के उपरांत विधिवत आलौकिक तरीके से अग्नि मंथन कर अग्नि का आहवान किया गया और उत्पन्न हुई अग्नि से यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। यज्ञारंभ के साथ नवाहुति हुई। परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने गायत्री पूजन का महत्व बताते हुए कहाकि हमारे वेदों के मंत्रों में अद्भुत शक्ति होती है । लेकिन यह बात केवल वही लोग समझ सकेंगे जिन्होंने मन्त्र शक्ति की विलक्षणता का या तो अपने जीवन में अनुभव किया है या फिर शास्त्रीय व धार्मिक दृष्टि से विश्वास करते है । उन्होंने बताया कि गायत्री मन्त्र सद्बुद्धि का मन्त्र है । जिसमें ऐसी विलक्षण सामर्थ्य है कि यह उपासक के हृदय और मस्तिष्क पर आश्चर्यजनक प्रभाव डालता है । ब्रह्मचारी ने कहाकि गायत्री महामंत्र का नित्य – निरंतर जप करने से अंतःकरण की गहराई में जड़े जमायें बैठे कुविचार यथा काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और द्वेष आदि का उखड़ना शुरू हो जाता है ।

इसके विपरीत धैर्य, आत्मविश्वास, साहस, निर्भयता, सूझबूझ, परिश्रमशीलता, नियमितता और शांति जैसे सद्गुणों की नित्य निरंतर अभिवृद्धि होती जाती है । इस मौके पर जयराम शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष टी के शर्मा, सोनीपत से अशोक गर्ग, श्रवण गुप्ता, राजेंद्र सिंघल, कुलवंत सैनी, ईश्वर गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, के के गर्ग, यशपाल राणा, के के कौशिक एडवोकेट, खरैती लाल सिंगला, टेक सिंह लौहार माजरा, सतबीर कौशिक, रोहित कौशिक, सुनील गौरी, इत्यादि भी मौजूद थे।

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