कुरूक्षेत्र, 15 मार्च- श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव कुमार ने कहा कि आयुष चिकित्सा को आधुनिक अनुसंधानों एवं उपकरणों की मदद से ओर अधिक कारगर बनाया जा सकता है। इससे मरीजों का उपचार ओर अधिक प्रभावी ढंग से सम्भव हो सकता है।
कुलपति ने आज विश्वविद्यालय में संयुक्त चिकित्सा पद्धति पर आयोजित एक सेमिनार में कहा कि भावी आयुष चिकित्सकों को न केवल आयुष की पद्धतियों को पढना एवं सीखना चाहिए बल्कि उसी से लोगों का उपचार करने को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुष विद्यार्थियों को चाहिए कि वे आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का प्रयोग करते हुए आयुष से ही उपचार करें ताकि मरीजों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
कार्यक्रम में बंगलौर से पहुंचे मेडिविजन के संयोजक श्री एम रामू ने कहा कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों को लर्न आयुर्वेद टू प्रैक्टिस आयुवेद को अपने जीवन का मंत्र बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय प्राचीन विधाओं को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है, जिसे आपकों ओर प्रोत्साहित करना होगा। दुनिया में आयुर्वेद का भविष्य सुनहरी है इसलिए इस विद्या का संचय मन लगा कर करना चाहिए।
महाविद्यालय के उप-प्राचार्य डॉ देवेन्द्र खुराना के संचालन में विश्वविद्यालय में आज आयुर्वेद पर आधारित प्रश्नोतरी प्रतियोगिता का आयोजन भी करवाया, जिसमें डाबर आयुर्वेद की टीम ने भाग लिया। प्रतियोगिता में आयुर्वेद से संबंधित प्रश्न पूछे गए, जिसमें 60-70 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें सोनू हरिकाल प्रथम, मनीष द्वितीय तथा किरण फोगाट तृतीय स्थान पर रही। विजेताओं को स्मृति चिहन तथा प्रमाण पत्र दिए गए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डॉ बलबीर संधु, डॉ राजा गुप्ता, डॉ बिजेन्द्र तोमर, डॉ सचिन, डाबर के क्षेत्रीय प्रबन्धक श्री राजन मेहता, राजीव सैनी, श्याम राजावत, कुलदीप पुनिया, हिमांशु ठाकुर, बृजमोहन, डॉ बिटटु, प्रेरित, अमित श्योराण सहित अनेक अधिकारी तथा विद्यार्थी मौजूद थे।
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