कुरुक्षेत्र। कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र द्वारा 1 से 25 मार्च तक कृषि वैज्ञानिक डा. जेएन भाटिया के नेतृत्व में चल रहे मशरूम प्रशिक्षण शिविर के दौरान बुधवार को 25 किसानों के दल ने बाखली स्थित सीएस मशरूम फार्म का दौरा किया। यहां पहुंचने पर सुलतान सिंह ने सभी किसानों को मशरूम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने सभी किसानों को मशरूम उगाने के तरीके, कंपोस्ट तैयार करने का तरीका, मशरूम तोडऩे, पैकिंग, कैनिंग यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट व कैंड मशरूम के बारे में विस्तार से बताया। सुलतान सिंह ने स्वयं द्वारा चलाए जा रहे मशरूम फार्म के बारे में शुरु से लेकर अब तक के सफर को विस्तार से बताया। उन्होने बताया कि वे एक शैड़ बनाकर या किसी कमरे से मशरूम का कार्य शुरु कर सकते हैं। एक शैड़ बनाने पर लगभग 25 हजार रूपए खर्च आते हैं। मशरूम का कार्य बहुत ही फायदे का सौदा है। हमें चाहिए कि हम गेहूं व धान की फसल उगाने के साथ-साथ मशरूम का कार्य शुरु करें। उन्होने बताया कि उन्होने शुरु में सिर्फ तीन शैड़ बनाकर मशरूम का कार्य शुरु किया था, लेकिन आज वे 10 एकड़ भूमि पर 140 शैड़ बनाकर कार्य कर रहे हैं। 2018-19 में उन्होने 500 टन मशरूम का उत्पादन किया है। मशरूम उत्पादन से हुए फायदे को देखते हुए उन्होने आज मशरूम पैकिंग व बीज बनाने का कार्य भी शुरु कर दिया है।
इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डा. जयनारायण भाटिया ने बताया कि मशरूम प्रोटीन का सबसे बड़ा जरिया है। देश में 40 करोड लोग कुपोषण के शिकार हैं, जबकि मशरूम का उत्पादन मात्र एक प्रतिशत ही किया जाता है। इसलिए आज देश में मशरूम के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी ओर मशरूम की खेती कर किसान मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। डा. भाटिया ने बताया कि किसान किसी कमरे या छप्पर के अंदर भी मशरूम को उगाया जा सकता है। खुंब की खेती छोटे, भूमिहीन किसानों, ग्रामीण महिलाओं व बेरोजगार युवकों के लिए आय का अच्छा साधन हैं। मशरूम की काश्त भूमिहीन व छोटे किसानों के लिए वरदान स्वरूप है।
Post Now India Post Now India