कुरुक्षेत्र, 23 अप्रैल। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान की ईएनबीआईओएस सोसायटी द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस 2019 के उपलक्ष्य में 22-23 अप्रैल को दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिन इस वर्ष के पृथ्वी दिवस के मुख्य विषय हमारी प्रजातियों का संरक्षण पर आधारित विभिन्न अंतर्विभागीय प्रतियोगिताओं आयोजित की गई। कार्यक्रम का आरम्भ नारों व पोस्टर प्रतियोगिताओं के साथ हुआ। इसके बाद पर्यावरण संबंधी प्रश्रोत्तरी, भाषण प्रतियोगिता तथा पैनल चर्चा का सफल आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न विभागों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन इस वर्ष के पृथ्वी दिवस के मुख्य विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में संस्थान की निदेशिका प्रो. स्मिता चौधरी ने मुख्य अतिथि डीन ऑफ कॉलेज एवं जीव विज्ञान संकाय प्रो. रजनीश शर्मा, पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से आए प्रो प्रो. डेजी बातिश व उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत एवं हार्दिक अभिनन्दन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अधिष्ठाता महाविद्यालय प्रो. रजनीश शर्मा के कहा कि मनुष्य इस पृथ्वी का एक छोटा-सा अंश है परन्तु वह इस पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहता है। मानव की यह प्रवृति जैव विविधता व पर्या्रवरण के क्षरण का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति अपने आप में बहुत सुंदर है, उसमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की व जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
प्रो. स्मिता ने पृथ्वी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सभी विद्यार्थियों को विश्व की लुप्त हो रही प्रजातियों, उनके अस्तित्व पर बढ़ते मानवीय खतरों व जैव विविधता के संरक्षण के उपायों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि विभिनन प्रजातियां हमारे पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, परन्तु आईयूसीन रेड लिस्ट में फिर भी विलुप्त होती प्रजातियों की संख्या निरंर बढ़ती ही जा रही है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. बातिश ने जैव विविधता विषय के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रकृति द्वारा प्र्रदान पारिस्थितिक तंत्र के सुचारू संचालन व पर्यावरण के सतत् विकास के लिए जैव विविधता का हर स्तर अपनी अहम भूमिका रखता है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पृथ्वी के सबसे अधिक उत्पादकता वाले उष्णकटिबंधीय वर्षा वन व समुद्रीय जल में व्याप्त कोरल रीटस मानवीस गतिविधियों के फलस्वरूप क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। प्रो. बातिश ने विद्यार्थियों से जैव विविधता द्वारा प्रद्ति पारिस्थितिकीय सेवाओं व उनके आर्थिक मूल्यांकन से भी अवगत करवाया। उन्होंने आज के आधुनिक समय को प्रजातियों के विलुप्त होने के कारण बताते हुए सभी से अपनी आहार प्रणाली को बदलने का आग्रह किया। इसके साथ ही जैव विविधता के संरक्षण के मुख्य उपायों पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों ने एक लघु नाटिका द्वारा सभी श्रोताओं का ध्यान वन्य जीवों के संरक्षण की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान में आयोजित विश्व ओजोन दिवस 2018 व पृथ्वी दिवस 2019 के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न अंतर्विभागीय गतिविधियो के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। संस्थान की निदेशिका प्रो. स्मिता चौधरी ने सभी विजेता विद्यार्थियों व इस कार्यक्र्रम को आयोजित करने में विद्यार्थियों के अथक परिश्रम के लिए उन्हें बधाई देकर उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कार्यक्र्रम में विभागों से उपस्थित प्रो. शारदा गुप्ता, प्रो. एनएन डोगरा, प्रो. नीलू सूद, डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. सोमवीर, डॉ. सुनीता दलाल, डॉ. सुशीला, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. पूजा अरोड़ा, मिनाक्षी सुहाग, दीप्ति, भावना, रश्मि, शिवानी, नीतिका, अंजलि सहित विभाग के शोधकर्ता, एमएससी व एमटेक के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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