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विज्डम वल्र्ड स्कूल की एक और उपलब्धि

कुरुक्षेत्र, 26 अपै्रल। विज्डम वल्र्ड स्कूल द्वारा हासिल उपलब्धियों में एक और उपलब्धि उस समय शुमार हो गई जब भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना के दूसरे चरण के घोषित परिणाम में विद्यालय की 12वीं कक्षा के विद्यार्थी रहे आर्यन ने न केवल इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया, बल्कि पूरे देश में 545वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन कर दिया। विज्डम वल्र्ड की प्राचार्या संगीता बहल ने बताया कि किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई) बेसिक साइंसेज में फैलोशिप का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू किया गया और वित्तपोषित है, जो बुनियादी विज्ञान पाठ्यक्रम और अनुसंधान करियर बनाने के लिए असाधारण रूप से प्रेरित छात्रों को आकर्षित करता है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जो शीर्षस्थ संस्थानों द्वारा पेश किए जाने वाले बुनियादी विज्ञान में कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए और मेधावी उम्मीदवारों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में प्रत्येक वर्ष लगभग 1 लाख छात्र परीक्षा के लिए उपस्थित होते हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालय की 12वीं कक्षा की विज्ञान संकाय के विद्यार्थी आर्यन ने दिसम्बर 2018 में आयोजित इस परीक्षा के प्रथम चरण को उत्तीर्ण किया था, अब इसके दूसरे चरण में आर्यन ने पूरे देश में 545वां रैंक हासिल कर न केवल अपने शिक्षकों, अपने अभिभावकों बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित करने का अवसर प्रदान किया है।

विद्यालय की निदेशिका अनिता रावल ने बताया कि इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने से अब आर्यन को देश में आईआईएससी और आईआईएसईआरएस जैसे सर्वश्रेष्ठ शोध संस्थानों में सीधे प्रवेश लेने में आसानी होगी। साथ ही जेईई और अन्य परीक्षाओं की तैयारी में मदद भी मिलेगी। किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना छात्रवृत्ति विज्ञान और अनुसंधान में कैरियर बनाने वाले छात्रों के लिए एक मील का पत्थर है। उन्होंने भी आर्यन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

छात्रवृत्ति और उच्च स्तरीय शोध संस्थानों में प्रवेश का मिलेगा लाभ
गौरतलब है कि इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने से अब आर्यन को यूजी पाठ्यक्रम के पहले 3 वर्षों के लिए, विज्ञान और चिकित्सा दोनों क्षेत्र में प्रति माह 5000 रुपए की एक बुनियादी छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। पूर्व पीएचडी स्तर तक एकीकृत कार्यक्रमों के बाद के प्रत्येक वर्ष के लिए यह राशि बढक़र 7000 रुपए तक मिलेगी। इतना ही नहीं आर्यन को पहले 3 वर्षों के लिए 20,000 का वार्षिक आकस्मिक अनुदान भी मिलेगा, जो बाद के वर्षों के लिए 28,000 तक मिलेगा।

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