करनाल 9 मई: माता-पिता के लिए उनके बच्चों से बढ़कर ओर कुछ नहीं होता। बच्चों की खुशी के लिए वह सब कुछ न्यौछावर करने के लिए तैयार रहते हैं। बचपन में उनकी बेहतर देखभाल, पढ़ाई-लिखाई से लेकर भविष्य में उनके सफल जीवन की चिंता सदैव माता-पिता के चेहरे पर देखी जा सकती है। बावजूद इसके बच्चों से जुड़े अपराध भी निरंतर बढ़ रहे हैं। आए दिन बच्चों की तस्करी और गुमशुदा होने के मामले सामने आते रहते हैं। बच्चे के गुम होने से परिवार को बहुत बड़े दुख का सामना करता है। सदैव यह आस बनी रहती है कि शायद बच्चें के मिलने की खबर आज मिल जाए।
ऐसा ही एक मामला जुण्डला के रहने वाले परिवार के साथ घटित हुआ। लगभग 2 माह से 17 वर्षीय रिया उर्फ मनप्रीत लापता थी। परिवार में रिया की दादी ने बच्ची को ढूंढने के लिए बहुत प्रयास किए थे। पुलिस प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई। इन सब प्रयासों के बाद भी बच्ची का कुछ पता नहीं चला। वीरवार को दादी दलजिन्द्र कौर की खुशी का ठिकाना ना रहा, जब वह अपनी पोती रिया उर्फ मनप्रीत से मिली और यह सम्भव हो पाया जिला बाल कल्याण समिति के चेयरमैन उमेश चानना और समिति के सदस्य चन्द्र प्रकाश, शोभना चौधरी, मीना काम्बोज तथा सीमा राणा के सामुहिक प्रयासों से।
चेयरमैन ने बताया कि जरूरी कार्यवाही पूरी करवाते हुए बच्ची रिया को दादी के सौंपा और बताया कि यह बच्ची किसी बात की नाराजगी के चलते करनाल से दिल्ली की ट्रेन में चढ़ गई और दिल्ली से भोपाल की ट्रेन पकड़ कर वहां चली गई। इसके उपरांत रिया भोपाल पुलिस को मिली, जिसके बाद इसे भोपाल की बाल कल्याण समिति के पास भेज दिया गया। जहां पहुंचने के बाद रिया कई दिनो तक बीमार रही और अपने परिवार व पते के बारे में नहीं बता पाई। कई दिनो तक काउंसलिंग करने के बाद रिया ने बताया कि वह करनाल की रहने वाली है, इसके बाद बाल कल्याण समिति भोपाल ने करनाल की बाल कल्याण समिति से सम्पर्क किया और बच्ची की फोटो सांझा की गई तथा बच्ची के पता ढूंढने के प्रयास तेज किए गए। इस बारे पुलिस से भी सम्पर्क किया गया। घर का पता मिलने पर परिवार को बच्ची की फोटो दिखाई गई और वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बच्ची रिया से बात करवाई गई। इसके बाद क्राईम ब्रांच ने बच्ची को लेने के लिए टीम को भोपाल भेजा और बहुत खुशी की बात है कि आज बच्ची परिवार से मिल पाई है।
चेयरमैन ने कहा कि बच्चों को परिवार में विशेष देखभाल की जरूरत रहती है। बच्चों का हर बात में जिद्ïद करना, किसी भी कीमत पर अपनी बात मनवा लेना, बार-बार समझाए जाने पर भी जान-बूझ कर शरारतें करना, सफाई से झूठ बोलना और अपनी गलती दूसरे के सिर डाल देना, यह ऐसी कुछ आदतें हैं जिन पर गौर करने की जरूरत हैं। अभिभावकों को अपने व्यवहार पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कई बार हमें लगता है कि बच्चें हैं, क्या फर्कपड़ता है। लेकिन हकीकत इसके उल्ट होती है। भाषा और व्यवहार का संतुलन ऐसी सौगात है, जिसे माता-पिता और घर के सभी बड़े सदस्य अपने घर के बच्चों को दे सकते हैं। आज के समय की जरूरत है कि नैतिक शिक्षा पुस्तकों से नहीं, बल्कि व्यवहार से दी जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति घटने वाले अपराधों पर भी अंकुश लगे, इसके लिए भी समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बाल श्रम, बाल तस्करी तथा बाल यौन शौषण के बारे में बच्चों को खुलकर बताएं और यदि आस-पास इस प्रकार की कोई घटना देखने व सुनने को मिलती है, तो इसकी सूचना अविलम्ब चाईल्ड हैल्प लाईन नम्बर 1098 पर दें।
इस मौके पर एएसआई जितेन्द्र, महिला थाने से नीलम, चाईल्ड हैल्प लाईन से भावना तथा जिला बाल कल्याण समिति से किरण बजाज उपस्थित रही।
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