कुरुक्षेत्र, 18 मई: सलारपुर रोड स्थित श्री नर्मदेश्वर महादेव आश्रम में शनिवार को वैशाख पूर्णिमा के उपलक्ष्य में कराए गए श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ को विश्राम दिया गया। आश्रम के संचालक पंडित महेश भारद्वाज ने बताया कि संस्थापक दंडी स्वामी निगम बोध तीर्थ महाराज की प्रेरणा से प्रत्येक पूर्णिमा को रामायण पाठ, हवन एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है। भक्ति प्रवचनों में भारद्वाज ने कहा कि रामायण सत्य सनातन धर्म का वह अंग है, जिसके माध्यम से रघुनंदन श्रीराम की गाथा कही गई है। रामायण के सात अध्याय हैं, जो कांड के नाम से जाने जाते हैं- ये हैं बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड। भगवान राम विष्णु के अवतार हैं। रामायण का समय त्रेता युग का माना जाता है। श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित ग्रंथ है, जिसे पूरे विश्व में ख्याति प्राप्त है। रामायण का उद्देश्य पृथ्वी लोक में मानव को आदर्श जीवन जीने का मार्गदर्शन देना है। भक्ति प्रवचनों के बाद महिला श्रद्घालुओं ने कीर्तन किया। कीर्तन के बाद हवन का आयोजन किया गया, जिसमें यजमानों ने आहुतियां दी। दोपहर को भंडारे में भक्तों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर कुलदीप शर्मा, राजबीर शर्मा, पंकज शर्मा, मास्टर बलभद्र स्वरूप, पंडित पिनाकी शर्मा, बालकृष्ण वर्मा, शिवकुमार शर्मा, रघुबीर शर्मा, ओमप्रकाश, गंगा देवी, प्रियंका, ऊषा, निशा, सुदेश, कविता, पिंकी, किरण शर्मा, आशा, सुदर्शन देवी, सरोज, ममता, प्रोमिला, सारिका, मधु और सारिका इत्यादि शामिल रही।
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