करनाल 29 मई: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानो का आह्वान किया कि वे लगातार गिरते भू-जल स्तर की समस्या से निपटने के लिए धान की जगह मक्का व अरहर जैसी फसलों की बिजाई करें, क्योंकि इनमें पानी की कम खपत होती है। सरकार इन फसलों को बढ़ावा देने के लिए किसानो को प्रति एकड़ 2 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी और फसलो का बीमा नि:शुल्क होगा। मुख्यमंत्री आज चण्डीगढ़ से विडियो कॉन्फ्रैंसिंग के जरिए सरकार की जल ही जीवन योजना का शुभारम्भ करने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलो के किसानो से संवाद कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हम वर्तमान की चिंता करते हैं, यह स्वभाविक है लेकिन हमें भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए, क्योंकि यदि भूमिगत जल का इसी तरह से दोहन होता रहा, तो आने वाली पीढ़ीयों के लिए जल की विकराल समस्या पैदा होगी। लोगो का यह भी मानना है कि चौथा विश्वयुद्ध पानी को लेकर हो। मुख्यमंत्री का कहना था कि फसल विविधिकरण आज के समय की मांग है, क्योंकि इससे लाखो लीटर पानी की बचत होती है। दूसरी और किसान जिस धान की परम्परागत खेती कर रहे हैं, उसमें एक किलो चावल पैदा करने के लिए 4 से 5 हजार लीटर पानी की मात्रा लग जाती है। मक्का जैसी फसलों को पैदा करने के लिए 30 से 40 प्रतिशत पानी बचता है। उन्होंने कहा कि पानी प्रकृति की ओर से दी गई अनमोल दात है। जल है तो जीवन है, इसका संरक्षण जरूरी है। प्रकृति के नियमो से छेड़छाड़ नही करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान इस बार धान की जगह मक्का की बिजाई करें, इसके लिए बीज नि:शुल्क मिलेगा। मार्किटिंग की उचित व्यवस्था रहेगी और किसानो की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाएगा, बिजाई के लिए कृषि यंत्र भी उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि किसान इसे अपने ऊपर एक थोपी हुई चीज ना समझें। जिन क्षेत्रो में नहरी पानी की उपलब्धता है, वहां के किसान धान की फसल ले सकते हैं, लेकिन उसे डीएसआर यानि मशीन से धान की सीधी बिजाई या ड्रिप इरीगेशन को अपनाएं। जहां पानी की समस्या है और भू-जल काफी नीचे चला गया है, वहां धान ना लगाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान देश के अन्नदाता हैं, वे लाभ और हानि पर ज्यादा विचार ना करके पानी की बचत पर ध्यान दें, सरकार उनके साथ है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से पंचायती जमीनो पर कोई भी व्यक्ति धान नही लगाएगा, इस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और इससे अच्छा संदेश भी जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना में इस वर्ष इन खण्ड़ो में 50 हजार हैक्टेयर में मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, किसान लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग दें।
विडियो कॉन्फ्रैंस में मुख्यमंत्री ने आज पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलो के 8 खण्ड़ो से इस योजना की शुरूआत की। इनमें करनाल का असंध ब्लॉक, कैथल का पुंडरी, जींद का नरवाना, कुरूक्षेत्र का थानेसर, अम्बाला का साहा व अम्बाला-1, यमुनानगर का रादौर तथा सोनीपत का गन्नौर खण्ड़ शामिल हैं। उन्होंने इन खण्ड़ो से आए किसानो से संवाद करते हुए उनके सुझाव भी लिए। असंध खण्ड़ के गांव सालवन के जोगिन्द्र व मित्रसेन, मानपुरा के भूपेन्द्र ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि सरकार की योजना अच्छी है और सभी किसान इसका स्वागत करते हैं, लेकिन मक्के की फसल को नील रोज नुकसान पहुंचाती है, इसका उपाय भी सरकार को करना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री का कहना था कि सरकार इस पर गम्भीरता से विचार कर रही है और जल्द ही इसका समाधान निकलेगा।
विडियो कॉन्फ्रैंस में उपस्थित असंध के विधायक सरदार बख्शीश सिंह विर्क ने मुख्यमंत्री का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया और किसानो की ओर से आश्वासन दिलाया कि स्कीम के सफल क्रियान्वयन और जल की बचत के लिए असंध प्रदेश का मॉडल ब्लॉक बनेगा। उन्होंने किसानो से अपील की कि वे देशहित में स्वेच्छा से फसल विविधिकरण को अपनाएं, इससे पानी की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मक्का को बेचने के लिए किसानो को कोई दिक्कत नही आएगी और उसका उचित भाव मिलेगा। उन्होंने किसानो को बताया कि हरियाणा में मुर्गी पालन का व्यवसाय बड़े स्तर पर हो रहा है। मुर्गियों कीफीड के लिए इसके संचालको को दूसरे प्रदेशो से मक्कीदाना मंगवाना पड़ता है, उनकी इस जरूरत को पूरा करने के लिए मक्के की फसल के मनमाने भाव मिल सकते हैं।
स्कीम के असंध ब्लॉक के नोडल अधिकारी एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग हरियाणा के महानिदेशक टी.एल. सत्यप्रकाश ने भी किसानो को पानी की बचत के लिए धान की फसल की बजाय मक्का की फसल लगाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसानो की इस सम्बंध में जो भी समस्या होगी, उनको दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
करनाल के अतिरिक्त उपायुक्त अनिश यादव ने विडियो कॉन्फ्रैंस में उपस्थित असंध ब्लॉक के किसानो, विधायक एवं इस स्कीम के नोडल अधिकारी का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित कृषि अधिकारियों से कहा कि वे गांव-गांव में जाकर इस स्कीम का प्रचार करें। संयुक्त निदेशक जगदीप बराड़, डीडीपीओ गगनदीप सिंह, उप कृषि निदेशक आदित्य प्रताप डबास व मक्का वैज्ञानिक डॉ. मेहर चंद काम्बोज भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
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