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डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना योजना के तहत दी जाती है आर्थिक सहायता: उपायुक्त

कुरुक्षेत्र 9 जून: हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत राज्य के 18 वर्ष से 70 वर्ष तक की आयु वर्ग के व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु या अपंगता होने पर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। यह योजना पूरी तरह से निशुल्क है तथा पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत किसी भी प्रकार के प्रीमियम का भुगतान नहीं करना होता। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत आने वाले केस इस योजना में कवर नहीं होंगे।

उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने बताया कि सरकार द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना शुरू की गई है, जो एक दुर्घटना बीमा योजना है। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु और दुर्घटना के कारण विकलांगता होने पर एक लाख रुपये का बीमा कवर मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत मृत्यु, रेल, सडक़ या हवाई दुर्घटनाओं, दंगों, हड़ताल और आतंकवाद जैसी दुर्घटनाओं के कारण स्थायी विकलांगता या विकलांगता, सांप के काटने, डूबने, विष, करंट लगने, ऊंचाई से गिरने, मकान या भवन के गिरने, अग्नि, विस्फोट, हत्या, जानवरों के हमले, भगदड़ और घुटन, पाला मारने, लू लगने, बिजली गिरने, जलने, भूख या भुखमरी (केवल मृत्यु) और प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु जैसे मामले कवर होंगे।

उन्होंने बताया कि इस योजना में व्यावसायिक खतरों जैसे कि थ्रेशिंग मशीन या औद्योगिक मशीन या किसी अन्य अप्राकृतिक घटना के कारण मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता भी शामिल होंगी। योजना के तहत युद्ध और इससे संबंधित खतरे, परमाणु जोखिम और जानबुझ कर स्वयं को चोट पहुंचाने, आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास, मादक पेय या मादक पदार्थों के कारण, यात्री के रूप में हवाई यात्रा के अलावा हवाई गतिविधियों में लिप्त होने तथा आपराधिक इरादे से किसी भी कानून का उल्लंघन करने के मामले शामिल नहीं होंगे।

डीसी ने बताया कि इस योजना के तहत दुर्घटना पीडि़त या पात्र संबंधी (मृत्यु के मामले में) द्वारा आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी को किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मृत्यु के मामले में, इस योजना के तहत जमा करवाए जाने वाले दस्तावेजों में दावा फार्म, हरियाणा डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी राज्य में निवास का प्रमाण पत्र, दुर्घटना पीडि़त का आयु प्रमाण, दुर्घटना पीडि़त और पात्र रिश्तेदार (मृत्यु के मामले में) का आधार कार्ड, एफआईआर या पुलिस रोजनामचा रिपोर्ट, पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र और यदि दावेदार जीवित पति या पत्नी है तो इस आशय का हलफनामा कि उसने पुनर्विवाह नहीं किया है, शामिल होंगे। इसी तरह, विकलांगता के मामले में, जमा किए गए दस्तावेजों में दावा फार्म, हरियाणा डॉमिसाइल प्रमाण पत्र और सक्षम प्राधिकारी द्वारा राज्य में निवास का प्रमाण पत्र, आयु का प्रमाण, आधार कार्ड और विकलांगता की प्रतिशतता तथा उसके प्रकार की पुष्टि करते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट तथा मेडिको-लीगल रिपोर्ट शामिल होंगी। मृत्यु की तिथि के छह महीने बाद तथा विकलांगता की तिथि से 12 महीनों बाद जमा करवाए गए किसी भी दावे पर विचार नहीं किया जाएगा।

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