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ऊंच-नीच के भेद को खत्म कर गया कोर्ट मार्शल, सुदेश शर्मा के निर्देशन में हुआ नाटक

हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर द्वारा आयोजित किए गए तीन दिवसीय राष्टीय नाट्य उत्सव का समापन चण्डीगढ़ के थियेटर फार थियेटर के कलाकारों द्वारा नाटक कोर्ट मार्शल से समापन हुआ। गौरतलब है कि मैक द्वारा भारतीय सेना को समर्पित नाट्य उत्सव में पहले दिन प्रयागराज से आए कलाकारों ने नक्सलवाद की ओर बढ़ रहे युवाओं के साथ होने वाले दुव्र्यवहार तथा उनके परिजनों की तड़प को बयां किया। वहीं दूसरे दिन रवि मोहन के निर्देशन में सफींदों के कलाकारों ने भारत और चीन के 1962 में हुए युद्ध के अंतिम दिन की व्यथा को दिखाया। उत्सव का समापन चण्डीग़ढ़ के कलाकारों ने स्वदेश दीपक द्वारा लिखित नाटक कोर्ट मार्शल से किया। नाटक मंचन के दौरान भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष रजनीश गुप्ता बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे। मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया। कार्यक्रम से पूर्व मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। सुदेश शर्मा के निर्देशन में तैयार नाटक में दिखाया कि सेना में कुछ उंचे पद के अधिकारी अपने से नीचे पद के जवान के साथ भेदभाव करते हैं, जिसके बाद मानसिक रुप से परेशान होकर जवान अपने अधिकारी का खून कर देता है। जिसके बाद जवान का कोर्ट मार्शल किया जाता है। कोर्ट में प्रिसाईडिंग आॅफिसर कर्नल सूरत सिंह दोनों पक्ष को जानने का प्रयास करते हैं, जिसमें जवान रामचंद्र की ओर से कैप्टन विकास राॅय तथा अधिकारियों की ओर से कैप्टन मेजर पुरी केस लड़ते हैं। जवान रामचंद्र पर सेना के नियमों का उल्लघंन करते हुए अपने अधिकारी पर गोली चलाने तथा मर्डर करने का आरोप लगता है। कैप्टन विकास राॅय अन्य अधिकारियों से पूछताछ करते हुए रामचंद्र की पैरवी करती हैं। पूछताछ में पता चलता है कि रामचंद्र नीची जाति का होने के कारण आला अधिकारी रामचंद्र को जातिसूचक शब्द कहते थे तथा उसकी मां के चरित्र के लिए भी बोलते थे। जिसके कारण रामंचद्र ने गोली चलाई। कर्नल सूरत सिंह कोई भी फैंसला सुनाने में खुद को असमर्थ समझते हैं और रामंचद्र को अपनी एक पार्टी में आमंत्रित करते हैं। कैप्टन कपूर स्वयं को बेइज्जत महसूस करते हैं और खुद को गोली मार लेते हैं। इस प्रकार उंच नीच के भेदभाव को समाप्त करने में नाटक एक अच्छी सीख देने में कामयाब रहा। नाटक के दौरान आलम ऐसा था कि दर्शक एकाग्र होकर प्रस्तुति देख रहे थे, तथा नाटक के बाद खड़े होकर तालिंया बजाते हुए कलाकारों की हौंसला अफजाई की। नाटक में कर्नल सूरत सिंह की भूमिका नाटक निर्देशक सुदेश शर्मा ने निभाई। वहीं रामचंद्र की भूमिका हरविंद्र सिंह, कैप्टन विकास राॅय की भूमिका में वर्षा, मेजर पूरी तमन्ना, डा. गुप्ता कनिका शर्मा, सीईओ की भूमिका में सौरभ शर्मा, कपूर की भूमिका में नवदीप संधू, सदस्य की भूमिका में विक्रंात सेठ व नरेश भगत ने अपने के जौहर दिखाए। प्रकाश व्यवस्था मनीष डोगरा ने सम्भाली। नाटक के अंत में मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा ने अतिथियों को पौधा भेंटकर आभार जताया।

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