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कैथल सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक जगदीप सिंह के निर्देशानुसार गन्ना प्रजनन संस्थान करनाल के वैज्ञानिकों ने चीनी मिल क्षेत्र का दौरा किया

कैथल, 18 जुलाई: कैथल सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक जगदीप सिंह के निर्देशानुसार गन्ना प्रजनन संस्थान करनाल के वैज्ञानिकों ने चीनी मिल क्षेत्र का दौरा किया, ताकि गन्ना की फसल की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। टीम ने गांव संगरौली, डुलयाणी, मटरवा खेड़ी, फरल, फतेहपुर, टयोंठा व टीक गांव में जाकर किसानों को गन्ने में लगने वाले मुख्य कीटों व बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी तथा गन्ने की पैदावार कैसे बढ़ाई जाए, इसके बारे में भी किसानों को आवश्यक टिप्स दिए गए। इस दौरे के दौरान ओवर आल गन्ना फसल अच्छी पाई गई, लेकिन कुछ खेतों में माईटस (मकड़ी) व स्मट नामक बीमारी का आंशिक असर देखने को मिला।

गन्ना कीट विशेषज्ञ डॉ. एसके पांडे ने बताया कि माईटस आंखों से साधारणत: दिखाई नही देती, यह पत्तों की निचली तरफ जाले में पलती है। इसके नियंत्रण हेतू 500 मि.ली. मिथाईल डैमेटान (मैटासिस्टाक्स) या 600 मि.ली डायमैथोएट (रोगोर) 30 ई.सी. को 250 पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़के। यह कीटनाशक गन्ना फसल में चुरड़ा (थ्रिप्स) की भी रोकथाम करते हैं। गन्ना रोग विशेषज्ञ डॉ. एम.एम छाबड़ा ने बताया कि गन्ना फसल में कैथल मिल क्षेत्र स्मट कडुआ रोग की कहीं-कहीं उपस्थिति दर्ज की गई है। इसके अलावा फसल में काई बीमारी नही मिली। स्मट की रोकथाम हेतू विशेषज्ञ ने किसानों को बताया कि रोग रहित खेत से बीज ले। रोगी पौधो को खेत से निकालकर नष्ट करें व नम गर्म विधि से उपचारित बीज से पैदा की हुई नर्सरियों से ही गन्ना बिजाई के लिए बीज लें।

टीम के साथ उपस्थित रहे डा. देशराज कार्यवाहक गन्ना विपणन अधिकारी ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि मिल के पास गन्ना बीज को उपचारित करने के लिए तीन मोबाईल नम गर्म हवा संयंत्र मौजूद है, जो किसानों को मिल द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं, ताकि किसान उत्तम मलिटी का गन्ना पैदा कर सके। इतना ही नही किसानों को संयंत्रों द्वारा बीज उपचारित करने की एवज में 2 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान भी दिया जाता है। इन मोबाईल संयंत्रों से किसान सीधे अपने खेत में ले जाकर बीज उपचारित कर सकते हैं। इस मौके पर डॉ. सतपाल सिंह, सुलतान सिंह के अलावा अन्य किसान मौजूद रहे।

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