करनाल। 19 जुलाई। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति करनाल(नराकास) के तत्वावधान में केनरा बैंक अंचल कार्यालय करनाल के द्वारा नगर में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सेक्टर 12 कार्यालय में नगरस्तरीय संयुक्त अन्तर बैंक राजभाषा संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में बैंकिंग एवं व्यवसाय में राजभाषा हिन्दी का उज्ज्वल भविष्य विषय पर आधारित संगोष्ठी में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति करनाल के केन्द्र सरकार के सदस्य कार्यालयों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों ने भाग लिया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उप महाप्रबंधक अमरजीत सिंह ने कहा कि बैंकिंग एवं व्यवसाय के क्षेत्र में राजभाषा हिन्दी का प्रसार बढ़ने से ही जन-जन तक बैंकिंग व्यवसाय की पहुंच सुनिश्चित हुई है। भविष्य में बैंकिंग और व्यवसाय के क्षेत्र में राजभाषा के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने यह आह्वान किया कि सभी कार्यपालकों एवं राजभाषा अधिकारियों को इसके लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। एनडीआरआई के वित्त नियंत्रक डीडी वर्मा ने अपने अतिथि संबोधन में यह बताया कि बैंकिंग एक सेवा उद्योग है और किसी भी सेवा उद्योग में ग्राहक की भाषा का महत्व बहुत अधिक होता है। बैंकों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाना न सिर्फ एक सांविधिक दायित्व है, बल्कि इससे बैंकिंग का कार्य जन-जन तक पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंकिंग सेवा क्षेत्र में हिन्दी के प्रयोग से बहुसंख्यक हिन्दी भाषी समाज का बैंकों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय समावेशन एवं विशेष रूप से गॉंव, गरीबों और कृषकों को लक्षित करके तैयार की गई योजनाओं में हिन्दी सशक्त भूमिका निभा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि बैंकों के द्वारा अब सरल एवं सुगम हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाना तभी संभव होगा जब बैंक में रूटीन कार्यों के लिए प्रयुक्त कंप्यूटर एप्लीकेशनों में राजभाषा नीति के अनुकूल द्विभाषी रूप में कार्य करने की सुविधा हो और उस सुविधा के उपयोग के लिए सभी कर्मचारी प्रशिक्षित हों। इस दिशा में हम काफी आगे बढ़ चुके हैं – विशेषकर वर्ड प्रोसेसिंग आदि में हिंदी का प्रयोग करना अब हमारे लिए कोई समस्या नहीं है, भाषायी इंटरफेस की मदद से पासबुक और एफडीआर भी अब सीबीएस से हिंदी में जारी होने लगे हैं। तथापि, कार्य-विशेष के लिए बनवाए गए एप्लीकेशनों में हिंदी के प्रयोग को संभव बनाने के लिए हमें और प्रयास करने होंगे।
कार्यक्रम के दौरान केनरा बैंक के अधिकारी राकेश जैन ने पावरप्वाइंट के माध्यम से विशेष प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समन्वयक एवं नराकास सदस्य सचिव राकेश कुमार कुशवाहा ने यह बताया कि नराकास करनाल करनाल नगर में स्थित केन्द्र सरकार के 51 कार्यालयों, शोध संस्थानों, विद्यालयों व बैंकों को राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार व कार्यान्वयन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। समिति के तत्वावधान में सदस्य कार्यालयों के द्वारा अपने-अपने कार्यालयों में राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर कार्यालय राजभाषा संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन करके नगर में परस्पर सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने समिति की ओर से केनरा बैंक द्वारा राजभाषा हिन्दी के प्रचार, प्रसार एवं कार्यान्वयन की दिशा में किए जा रहे सराहनीय कार्यों की सराहना भी की। बैठक में सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान के डा. अनुज कुमार, यूको बैंक की प्रतिभा रतन, इंडियन बैंक के बिन्देश्वरी प्रसाद, सिंडिकेट बैंक के अनिल कुमार अनेजा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सनोज, इलाहाबाद बैंक के प्रवीण कुमार, दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कं. लि. की नवनीता, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की निधि, एमएसएमई की उषा कत्याल, बैंक ऑफ इंडिया की अंकिता सपड़ा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के पवन कुमार झा, इंडियन ओवरसीज बैंक की कुसुम लता, कार्पोरेशन बैंक के ओम प्रकाश, केनरा बैंक के भीष्म कुमार मेहता व नीति मिंज ने प्रमुखता से अपने विचार रखे। सहायक महाप्रबंधक सुशील कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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