कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद व मल्टी आर्ट कल्चर सैंटर की ओर से द मिलेनियम स्कूल में हरियाणवी लोकगीतों पर कार्यशाला चल रही है। कार्यशाला 20 से 29 जुलाई तक चलेगी। कार्यशाला में मल्टी आर्ट कलचर सैंटर की ओर से प्रशिक्षिका मीनू रानी छात्राओं को हरियाणवी लोकगीतों के गुर सीखा रही हैं। छात्राओं को संबोधित करते हुए प्रशिक्षिका मीनू रानी ने कहा कि हमें अपनी मातृ बोली बोलने में कोई शर्म नही करनी चाहिए बल्कि चाव के साथ अपनी बोली हरियाणवी को बोलना चाहिए। उन्होने कहा कि हरियाणवी खडी बोली है, हरियाणवी बोलने वाले व्यक्ति को दूर से पहचाना जा सकता है। भारत गांवों में बसता है और हरियाणा के गांवों में हर मौके के अलग-अलग गीत होते हैं। यहां शादी-विवाह व हर तीज त्यौहार के अलग-अलग गीत हैं, जोकि आज भी ग्रामीण महिलाओं के मुख से आसानी से सुने जा सकते हैं। द मिलेनियम स्कूल की छात्राओं को भी विवाह के गीत व भजन सीखाए जा रहे हैं। शुक्रवार को छात्राओं ने विवाह के दौरान खेड़ा पूजन व बारात के गीत सीखे। इसके अलावा भजन मतना फोडै़ मेरी मटकी, घणी जान तै प्यारी सै व बन्नी का गीत लाडो पूच्छै दादे नै ओ दादा, मै किस मिस देखण जाऊं रंगीले बांगां मैं इत्यादि लोकगीत सीखे। विद्यालय के प्रिंसीपल ए.के सिंह ने बताया कि मल्टी आर्ट कल्चर सैंटर की ओर से द मिलेनियम स्कूल में आयोजित हरियाणवी लोकगीतों की कार्यशाला में बच्चे हरियाणवी लोकगीतों के गुर सीख रहे हैं। इन लोकगीतों को बच्चे चाव-चाव सीख रहे हैं। उन्होने कहा कि इस कार्यशाला से वे प्रभावित हुए हैं, इसलिए विद्यालय परिसर में आयोजित होने वाले हरियाणा दिवस कार्यक्रम को कंपलीट हरियाणवी में करने का फैसला लिया गया है। इस मौके पर संगीत शिक्षक भवनिश माटा व मयंक भारद्वाज मौजूद रहे।
Post Now India Post Now India