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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत-पालि-प्राकृत विभाग द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह का हुआ समापन

कुरुक्षेत्र, 19 अगस्त। सोमवार को संस्कृत-पालि-प्राकृत विभाग द्वारा संस्कृत सप्ताह के समापन अवसर पर अन्तर महाविद्यालय श्लोकोच्चारण एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘हरियाणा गौरव सम्मान‘ के लिए चयनित, निरुक्त-मीमांसा सदृश अनेक संस्कृत ग्रंथों के रचयिता आचार्य शिवनारायण शास्त्री मुख्य अतिथि रहे। भिवानी-भागलपुर से आए आचार्य माई जी महाराज विशिष्ट अतिथि तथा उनकी शिष्या साध्वी राधिका अति विशिष्ट अतिथि रहीं। सम्मानित-अतिथि के रूप में होशियार सिंह, नगर परियोजनाकार उपस्थित हुए तथा डॉ. महेन्द्र हंस सारस्वत अतिथि रहे।

कार्यक्रम का आरम्भ विधिवत् दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम के संयोजक एवं मंच संचालक डॉ. ललित कुमार गौड़ ने कार्यक्रम की रूपरेखा से सभी को अवगत कराया। डॉ. सुरेन्द्र मोहन मिश्र ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया। विभागाध्याक्षा प्रो. कृष्णा देवी ने सभी अतिथियों को उत्तरीय एवं स्मृतिचिहन भेंट किए। मुख्य अतिथि आचार्य शिवनारायण शास्त्री ने अपने व्यवसाय में कहा कि अध्ययन-अध्यापन में अर्थ का बहुत महत्व है क्योंकि अर्थ के बिना शब्द राशि व्यर्थ है। उन्होंने ऋग्वेद के मंत्रों को हिन्दी चौपाई में लिखी गई अपनी पुस्तक से अवगत कराया। उन्होंने वैदिक छन्दों एवं भाषा-वैज्ञानिक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए वैदिक मंत्रों एवं वेद की ऐतिहासिकता पर विचार रखे। ‘वैदिक वाङ्मय में भाषा चिन्तन‘ नामक आपकी पुस्तक में अपने वैदिक भाषा का विवेचन प्रस्तुत किया है, तदनुसार वैदिक भाषा को सरल एवं अपने विवेक द्वारा ग्राहय बनाने का सन्देश दिया। संयोजिका डॉ. विभा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा मनु आर्य ने मंच संचालन किया।

भाषण प्रतियोगिता में संस्कृत-पालि-प्राकृत-विभाग के धीरज प्रथम, जयराम विद्यापीठ के अजय द्वितीय, संस्कृत-पालि-प्राकृत-विभाग के कृष्ण तृतीय रहे तथा आईआईएचएस के हरमीत को सात्वंना पुरस्कार मिला।

श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता में जीएमएन कॉलेज, अम्बाला कैन्ट के रबनूर प्रथम, संस्कृत-पालि-प्राकृत-विभाग के राजेश द्वितीय, श्री जयराम विद्यापीठ, कुरुक्षेत्र के अजय तीसरे स्थान पर रहे तथा सान्त्वना पुरस्कार स्वामी शंकर चैतन्य भारती संस्कृत महाविद्यालय, कुरुक्षेत्र के आशुतोष को प्राप्त हुआ।
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका डॉ. सीडीएस कौशल, डॉ. सुरेश एवं डॉ. अनुपमा ने निभाई। इस अवसर पर डॉ. राधाकृष्ण नैन, डॉ. सुभाष जडौला, सुरिन्दर, राजेश, सीमा, अंग्रेज, पवन, रविदत्त, संजय, मनीषा, मंजू, गीता, मोनिका एवं सभी छात्र उपस्थित रहे।

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