कुरुक्षेत्र, 29 अगस्त। गौ-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा सैक्टर-5 के शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा हवन एवं भंडारे के साथ सम्पन्न हुई। समापन दिवस पर कथावाचक अनिल शास्त्री ने श्री कृष्ण-उद्धव संवाद, श्रीकृष्ण की कुरुक्षेत्र यात्रा, भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु और भागवत जी की शिक्षाएं विस्तार से सुनाई। मुख्य यजमानों पूर्व मंत्री डॉ. एमएल रंगा, केयू के पूर्व कुलसचिव डॉ. हवा सिंह व रमेश शर्मा, कांग्रेस नेता परीक्षित मदान, पूर्व प्राचार्या राज शर्मा, डॉ. तेजपाल नागर,सुनील राय, डॉ. शकुंतला नागर, महेंद्र पाल मैहता, दलबीर सिंह, रमेश अरोड़ा, धीरज अरोड़ा, पवन गोयल व सीमी गोयल ने भागवत पूजन करके कथा को विश्राम दिया। प्रवचनों में अनिल शास्त्री ने कहा कि मधुर वाचन वाणी का तप है। वाणी यदि मधुर है तो संबंध मधुर बनेंगे और वाणी यदि कड़वी है तो कलह। जो कर्कश वाणी बोलते हैं, वे अपने दुर्भाग्य को बुलावा देते हैं। उन्होंने शिशुपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में जब शिशुपाल ने श्रीकृष्ण को अपशब्द कहे तो श्रीकृष्ण ने उसके सौ अपराध क्षमा किए। लेकिन 101वें अपराध पर उन्होंने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया। उन्होंने कहा कि असत्य भाषण, व्यर्थ वार्तालाप एवं किसी भी व्यक्ति की कमजोरी की चर्चा नहीं करनी चाहिए। भागवत कथा समाप्ति पर सभी श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ की परिक्रमा की। भागवत आरती में भूपेश सिंह, देवेंद्र शर्मा, शोभा ठाकुर, रामकुमार कौशिक, राजगीर नागपाल, राजरान सिंध्वानी, वीरमति, नीलम, पिंकी, रीटा आनंद, रामगोपाल बड्गुर्जर, सोमनाथ कक्कड़ अधिवक्ता,संतोष देवी, आशा भगत, चंदा भगत,रानी भगत, रंगनाथ तिवारी, बालकृष्ण, अनिकेत, मनिपाल चौहान व जयप्रकाश आश्री आदि शामिल रहे।
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