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जलता हुआ दीपक ही दूसरे दीपक को प्रज्वलित कर सकता है: डॉ. रामेन्द्र सिंह

कुरुक्षेत्र, 15 दिसम्बर (एस)। जलता हुआ दीपक ही दूसरे दीपक को प्रज्वलित कर सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान ने शनिवार को संपूर्ण देश में शिक्षकों एवं अभिभावकों के लिए अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया। यह आयोजन पूरे भारतवर्ष में एक साथ संपन्न हो पाना विद्या भारती जैसे गैर सरकारी संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। संस्थान का मुख्यालय कुरुक्षेत्र में है। अतः सभी कुरुक्षेत्रवासियों के लिए भी यह प्रसन्नता का विषय है।

विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने बताया कि शिक्षकों के लिए संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन वर्ष 1985 से प्रारम्भ हुआ था। प्रथम वर्ष इस परीक्षा में 3,000 शिक्षकों ने भाग लिया था। किन्तु यह परीक्षा शनैः-शनैः लोकप्रिय होती चली गई और अब तक इस परीक्षा में 9,45,844 शिक्षक प्रतिभागिता कर चुके हैं। आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप से इसका विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि हमारे मानबिन्दु गीता, गंगा, गऊ, तुलसी, हमारे पुण्य बिन्दु जिसमें पवित्र नदियां, तीर्थ, ऐतिहासिक धरोहर और शहीदों के बलिदान से पवित्र कण-कण इस देश की भूमि उसी संस्कृति की दृश्यमान कृतियां हैं। भारतीय संस्कृति चिरपुरातन तो है ही, लेकिन वह नित्य नूतन भी है जो हमें नित्य प्रति प्रेरणा देती रहती है।

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