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धान अनुसंधान केन्द्र के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डा.धर्म सिंह ने किसानों का आह्वान किया कि वे जल सरंक्षण में अमूल्य योगदान

ढांड, 10 सितंबर: धान अनुसंधान केन्द्र के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक डा.धर्म सिंह ने किसानों का आह्वान किया कि वे जल सरंक्षण में अमूल्य योगदान दें, ताकि प्रकृति के अनमोल संसाधन को बचाया जा सके। वर्तमान में जल सरंक्षण की आवश्यकता बढ़ गई है तथा हमें जल का आवश्यकतानुसार ही प्रयोग करना चाहिए।

डा.धर्म सिंह मंगलवार को कृषि महाविद्यालय कौल में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जल शक्ति अभियान विषय पर आयोजित जिला स्तरीय किसान मेले में उपस्थित किसानों को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले जल सरंक्षण अभियान के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतु कृषि महाविद्यालय कौल के विद्यार्थियों द्वारा गांव कौल में जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया। डॉ. धर्म सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भविष्य की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल शक्ति अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत वर्षा के जल का संचय करना, सूखे बोरवैल पुनर्जीवित करना, वाटर शैड तथा पौधारोपण शामिल हैं। इस अभियान के तहत सभी सरकारी भवनों के लिए वर्षा के जल को संचित करने हेतु रेन वाटर हार्वेसटिंग सिस्टम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों व उपस्थित छात्र-छात्राओं को भूमि व जल का संरक्षण करने, जैविक खेती एवं फसलों का विविधिकरण अपनाने की शपथ भी दिलवाई।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा वर्षा के जल के संचय के लिए जल शक्ति अभियान शुरू किया गया है। सभी किसान इस अभियान में अपना पूर्ण सहयोग दें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुआवजे के लंबित मामलों के निपटारे के लिए संबंधित बीमा कंपनियां के प्रतिनिधि कैथल के लघु सचिवालय स्थित विभाग के कार्यालय में सभी कार्य दिवसों में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि संबंधित किसान इस दौरान अपने मुआवजे के दावों का निपटारा करवा सकते हैं। सरकार के निर्देशानुसार इस योजना के सभी लंबित मुआवजा दावों का शत प्रतिशत निपटारा किया जाएगा।
कृषि महाविद्यालय के वरिष्ठï वैज्ञानिक डा.ओ.पी.लठवाल ने कहा कि किसान फसलों के अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबध्ंान योजना का लाभ उठाकर इन अवशेषों को कृषि यंत्रों की मदद से भूमि में मिलाएं ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ सके। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है, बल्कि भूमि में मौजूद मित्र कीट भी नष्टï होते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के समन्वयक डा. देवेन्द्र चहल ने किसानों से कहा कि जैविक खेती व फसलों के विविधिकरण को अपनाएं एवं खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा दें, ताकि खेती की लागत को कम करके आमदनी को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसानों की आय बढ़ाने के लिए पर्यासरत हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी की फसलों से अधिक से अधिक पैसा कमाया जा सकता है ताकि धान का रकबा कम किया जा सके और पानी की बचत हो सके।

डा. जसबीर सिंह ने जल संरक्षण के विशेष उपायों के बारे में किसानों को बताया कि धान की सीधी बिजाई करें, कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें उगाएं, सिंचाई की सूक्षम एवं फुवारा तकनीक अपनाए, बंद पड़े नलकूपों द्वारा बरसाती पानी जमीन में पहुंचाए, पक्के मकानों की छत के बरसाती पानी का सही इस्तेमाल करें। जिला स्तरीय किसान मेले में विभिन्न कम्पनियों व प्रगतिशील किसानों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका किसानों ने विशेष रूप से लाभ उठाया।

इस अवसर पर बागवानी विभाग के डा.प्रमोद कुमार,पशुपालन विभाग के डा. प्रताप सिंह, डा. मंगत राम,डॉ. भारद्वाज, कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. देवेन्द्र चहल, डॉ. जसबीर सिंह, डा. महा सिंह, डा. अश्वनी कुमार, डा. आवेश, डा. आर.सी. वर्मा प्रिंसिपल,डा.पी.एस. पवार, डा. एस.पी.गोयल, उद्यान विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की पूर्ण जानकारी दी। इस मौके पर प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह रसीना, सुरेन्द्र जाजनपुर, राजेश खेड़ी सिकंदर, गुरदयाल सिंह,फकीर चन्द, कुलवंत सांच, जगदीप कैलरम ने भी अपने अनुभव सांझा किए।

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