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भक्ति से मिलता है प्रभु के चरणों का प्रसाद – पुंडरीक गोस्वामी

कुरुक्षेत्र 15 दिसम्बर – गीता जयंती महोत्सव 2018 के अवसर पर जयराम विद्यापीठ में चल रही भागवत पुराण की कथा के चौथे दिन व्यासपीठ पर महामंडलेश्वर कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी  ने जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी के साथ विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना की। चौथे दिन व्यासपीठ पर विराजमान विश्व विख्यात कथाव्यास श्री मन्माधव गोडेश्वर वैष्णवाचार्य पूज्य पुण्डरीक गोस्वामी ने कथा के एक प्रसंग की चर्चा में कहाकि हर पिता का धर्म है कि वह अपनी संतान को धर्म सिखाए और संतान का धर्म है कि बुढ़ापे में पिता को धर्म का काम कराएं। अगर आपकी संतान धर्म युक्त संस्कारी नहीं है तो उसके जिम्मेदार माता-पिता हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है घर और शिक्षा है उस परिवार का संस्कार। पुण्डरीक गोस्वामी ने कहा कि अपनी जीवन शैली को संस्कारित बनाओ। हम यदि अपने माता-पिता का सम्मान नहीं कर सके तो अपनी संतान से सम्मान की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं। माता ही बताती है कि परमपिता कौन हैआजकल हमें अपनी संतान को संस्कार लाने के लिए बाजार से धर्म-कर्म और वेद साहित्य की सीडी लानी पड़ती है। विद्यापीठ में कथा के चौथे दिन भारी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्री कृष्ण जन्म मनाया गया।

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