कुरुक्षेत्र, 15 दिसंबर। 15 दिसंबर ऐसे महापुरुष की जन्म जयंती है, जिन्होंने भागीरथ बन ज्ञान के सागर सर्व शक्तिवान परमपिता परमात्मा को अपना माध्यम बनने दिया। दादा ने ईश्वर के महावाक्यों को मां की तरह अपने अनुभव के आधार पर सहज बना कर सरल भाषा में हम बच्चों के आगे रखा। मां का वात्सल्य, पिता का संरक्षण आप में हम सभी ने पाया। उपरोक्त विचार ब्रह्मकुमारीज कुरुक्षेत्र सेवा केंद्र की प्रभारी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने व्यक्त किए। वे सेवा केंद्र में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 143वीं जयंती कार्यक्रम पर बोल रही थी। इस दौरान ब्रह्मा बाबा जी के जन्म दिवस पर केक काट कर सभी में वितरित किया गया, जबकि इससे पहले राजयोग का अभ्यास किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने बताया कि 15 दिसंबर 1876 को आज के ही दिन एक ऐसे शिल्पकार, विश्व शांति के महानायक, आध्यात्म के प्रणेता, जिन्होंने अनगढ़ पत्थरों को तराश कर चमकदार हीरा बना दिया। सन 1937 में रोपा गया आध्यात्मिक क्रांति रूपी यह पौधा आज विशाल वटवृक्ष बन कर अपनी शीतल छाया में विश्व के 140 देशों के लाखों नागरिकों को शांति, शक्ति, पवित्रता, प्रेम, स्नेह, ज्ञान और जीवन मूल्यों से सुशोभित कर रहा है। आपके बताए मार्ग पर चल कर 12 लाख से अधिक लोग संयम के पथ के राही हैं। ऐसे युगपुरुष दादा लेखराज, जिन्हें परमात्मा ने दिव्य नाम दिया प्रजापिता ब्रह्मा।
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