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गीता ग्रंथ नहीं बल्कि बेहतर जीवन जीने का सिद्धांत है – प्रधानाचार्या सुनीता नरवाल

घरौंडा 17 दिसम्बर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या सुनीता नरवाल ने कहा कि गीता एक ग्रंथ ही नहीं बल्कि बेहतर जीवन जीने का सिद्धांत भी है। श्रीमद्भगवदगीता का भारतीय संस्कृति, धर्म एवं दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को गीता के संदेश को अपने जीवन में अपनाकर एक बेहतर समाज का निर्माण करना होगा।
प्रधानाचार्या सुनीता नरवाल सोमवार को स्कूल के प्रांगण में सूचना, जन सम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा आयोजित खंड स्तरीय गीता जयंती कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि हरियाणा की इस पावन धरा पर ही भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था और यह संदेश युगों-युगों तक मानव जाति का मार्गदर्शन करता रहेगा। हमारी प्राचीन संस्कृति की यह अमूल्य धरोहर ज्ञान, कर्म और भक्ति का बेजोड़ संगम है। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसके अनुसरण से मनुष्य पूरा जीवन आनंदमय रह सकता है। गीता जहां मानव को कत्र्तव्य का बोध करवाती है वहीं वह हमारे जीवन में नई चेतना का संचार भी करती है।
गीता का हर शब्द मनुष्य के जीवन के लिए परोपकार है, मनुष्य को गीता पढऩे से धर्म-अधर्म व सत्य-असत्य के बारे में जानकारी मिलती है। मनुष्य को गीता के माध्यम से अपने कत्र्तव्यों की जानकारी के साथ-साथ उसके निर्वाह के बारे में भी प्रेरणा मिलती है। हर व्यक्ति का कत्र्तव्य है कि वह अपने जीवन के उज्ज्वल भविष्य के लिए गीता को अपनाएं। उन्होंने कहा कि गीता ग्रंथ सभी समस्याओं का समाधान करता है। उन्होंने बच्चों को प्रेरणा देते हुए कहा कि वह गीता से कर्म करने की प्रेरणा लें। गीता सभी धर्मों के ग्रंथों का सार है गीता, गीता मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है, गीता में मनुष्य की शंकाओं का समाधान निहित है।
गीता जयंती कार्यक्रम में सूचना, जन सम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा भेजी गई इंडो वीर टू नाटक मंडली द्वारा गीता जी पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया गया तथा स्कूली बच्चों विकास और रिहाल द्वारा गीता पर आधारित अपना भाषण तथा श£ोकोच्चारण किया। इस अवसर पर प्राध्यापक शीशपाल, जोगिन्द्र सिंह, सुरेश कुमार, श्रीमती कैलाश, ईश कुमार, रामबीर सहित गणमान्य व्यक्ति तथा स्कूल के शिक्षक उपस्थित थे।

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