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आयुष्मान योजना बनी गरीबों के लिए वरदान: उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी

कैथल, 19 जुलाई ( ) प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान योजना दुनिया की पहली ऐसी महत्वाकांक्षी योजना है जो मजबूर और बेसहारा लोगों को महंगे ईलाज की सुविधा प्रदान कर उन्हें राहत प्रदान कर रही है। कड़ी मेहनत से बामुश्किल दो वक्त की रोटी कमाने वाला गरीब मजदूर जब किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है तो महंगे ईलाज के चलते ऐसी स्थिति में अपने आपको हालात को सौंपने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। ऐसा मजबूर व्यक्ति आखिर जिंदगी से हार जाता है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने ऐसे लोगों के अंदर एक उम्मीद की किरण जगाई है। इस योजना से ऐसे व्यक्तियों का लाभ मिल रहा है, जो जिदंगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, मुफ्त ईलाज की सुविधा पाकर उन्हें नई जिदंगी मिली है।

उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि इस महत्वकांक्षी योजना से जिला के गरीब आम जन को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। जिला कैथल में आयुष्मान भारत योजना के तहत सामान्य जिला अस्पताल सहित नगर के तीन निजि अस्पताल जिनमें सिग्नस अस्पताल, शाह अस्पताल तथा गणपति अस्पताल शामिल हैं। जिला में अब तक एक लाख 50 हजार गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 79121 परिवार आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं। इनमें 58 हजार 421 ग्रामीण तथा 20 हजार 700 शहरी क्षेत्र के परिवार शामिल हैं। अब तक जिला में 700 से अधिक रोगियों ने इस योजना के तहत मुफ्त ईलाज करवाकर स्वस्थ जीवन प्राप्त किया है। इनमें सामान्य अस्पताल में 300, सिग्नस अस्पताल में 300 तथा अन्य सूचिबद्घ अस्पतालों में 100 लोगों ने ईलाज करवाया है।

उन्होंने यह भी बताया कि जिला के कार्ड धारकों द्वारा निकटवर्ती जिलों करनाल, कुरूक्षेत्र, पानीपत इत्यादि में करवाई एक निशुल्क ईलाज करवाने वालों का आंकड़ा जोडे़ तो यह 2 हजार से भी अधिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि एक करोड़ 25 लाख रूपए इन रोगियों के उपचार पर खर्च हुए हैं। जो इस योजना में वहन हुए हैं। इनमें सिग्नस अस्पताल में किए गए ईलाज पर 90 लाख, सामान्य अस्पताल में 20 लाख, शाह अस्पताल में 10 लाख तथा अन्य अस्पतालों में 5 लाख रूपए का खर्च शामिल है। यह क्लेम एमाउंट आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों का प्रदान किया गया, जहां रोगियों का ईलाज किया गया है। उन्होंने ये भी बताया कि 1410 ट्रिटमेंट पैकेज के तहत ईलाज करवाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए परिवार के सदस्य अपना राशन कार्ड तथा आधार कार्ड अस्पतालों में तैनात आयुष्मान मित्र से मिलकर अपना नाम लाभार्थी सूची में चैक कर सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री नम्बर- 14555 पर काल करके वैबसाईट पर भी चैक किया जा सकता है। इसके साथ-साथ प्रार्थी अटल सेवा केन्द्र व आयुष्मान भारत के तहत पंजीकृत अस्पताल में जाकर अपना नाम चैक कर सकता है। उनका कहना था कि गरीब व्यक्ति कभी सपने में भी बडे़ निजी अस्पतालों में ईलाज के बारे में सोच नहीं सकता था और इस योजना के तहत गरीब व्यक्ति भी हर प्रकार ईलाज मुफ्त में करवाने के लिए सक्षम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना का महत्वपूर्ण पहलू ये है कि अपने गोल्डन कार्ड से पूरे देश में योजना के तहत सूचिबद्घ अस्पतालों में कहीं भी ईलाज करवाया जा सकता है। निजि अस्पतालों को ईलाज में किए गए खर्च की अदायगी सरकार के निर्धारित पैकेज के अनुसार 15 दिन में करने का प्रावधान है।

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों ने बताया अपना अनुभव

उपमंडल गुहला के पाबसर गांव के 62 वर्षीय मजदूर गुरदयाल सिंह जो दिल की बीमारी का ईलाज करवाते हुए दो स्टैंट डलवाने के बाद अस्पताल के आईसीयू में उपचाराधीन है, ने पूछने पर नम आंखों से कहा कि आयुष्मान योजना का कार्ड अगर न होता तो लाखों के खर्च के लिए उन्हें अपना मकान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता। भला हो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मनोहर लाल खट्टर सरकार जिनकी बजह से उनका ईलाज मुफ्त हो गया और वो बेघर होने से बच गया।

प्यौदा गांव के जयवीर का यहां पेसमेकर डाला गया है। उसके पास जाने पर उसके चेहरे पर आई मुस्कान ने इस मजबूर रोगी की मन की बात साफ कर दी। उसने कहा कि जिंदगी के इस मोड़ पर जब पेसमेकर डलवाने की जरूरत पड़ी तो हाथ पांव फूल गए, हालात के आगे घुटने टेकने के आलवा कोई चारा नहीं था। घर में अकेला कमाने वाला हूं। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना से इस बडे़ अस्पताल में जब निशुल्क पेसमेकर डाल कर सारी सुविधाएं दी गई तो एक नई जिंदगी मिली।

दरिया सिंह ने कहा कि मेहनत से गुजर बसर करके जिंदगी चल रही थी। एकाएक दिल में दर्द हुआ और जब असहनीय हो गया तो अस्पताल में दाखिल करवाया। मेरे पास योजना का गोल्डन कार्ड था जिसके चलते प्राईवेट अस्पताल में सभी आधुनिक सुविधाओं के बीच मेरा निशुल्क ईलाज हुआ और मुझसे किसी भी तरह कोई खर्च यहां नहीं लिया गया।

बाता गांव के रमेश जिन्होंने अपने छोटे भाई का ईलाज आयुष्मान भारत के तहत करवाया है, ने बताया कि महज 5 हजार रूपए की आमदन मजदूरी से हर माह होती है और परिवार के 6 लोगों को पालना भी एक बहुत बड़ी जिम्मेवारी है। एक जुलाई को मेरे छोटे भाई के गिरने की बजह से उसके बाएं बाजू की हड्डी टूट गई, जिसका ईलाज करवाना हमारे लिए बहुत दूर की बात थी। गांव के एक डाक्टर ने आयुष्मान भारत योजना की जानकारी दी और हमने परिवार का गोल्डकार्ड बनाया। कार्ड की सहायता से आज 40 से 50 हजार रूपए तक के खर्चे का ये अलाज मुफ्त में हुआ है। कार्ड न होता तो ब्याज पर पैसा उठाना पड़ता। अस्पताल में हमारा कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। मोदी जी ने गरीब लोगों के बारे में बहुत सोचा है और इस योजना से कई जिदंगियां बदली हैं।

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