इन्द्री/करनाल 9 अगस्त, पानी बचाने और उसके पुर्नभरण को लेकर अब हमारे किसान भी जागरूकता के साथ नए-नए तरीकों से प्रयोग कर रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण इन्द्री खण्ड़ के गांव जैनपुर साधान में सामने आया है। यहां के एक प्रगतिशील किसान साहब सिंह डबास ने असीमित वर्षा जल को इकठ्ठा कर उसे एक कुंए के जरिए ना केवल भूमिगत स्तह तक पहुंचाकर पुर्नभरण किया, बल्कि अपनी कई एकड़ फसल को बाढ़ के पानी से भी बचाने में कामयाबी हासिल की।
जैनपुर साधान इन्द्री-लाड़वा रोड़ पर स्थित है और साहब सिंह डबास इस क्षेत्र के प्रगतिशील किसान हैं, जो पिछले कई वर्षों से कृषि विविधिकरण को अपनाकर नेट हाऊस में सफलतापूर्वक गुलाब, खीरे व शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। ऐसी खेती से वे पानी का कम से कम प्रयोग करके अधिक मुनाफा ले रहे हैं। चालू मानसून सीजन में एक दिन जब भारी वर्षा हुई तो साथ लगते बडौंदा व छापर गांव की ओर से बड़ी मात्रा में बाढ़ का पानी उनके खेतो में आ गया। जमीन नीची होने के कारण फसलो में पानी भर जाने से साहब सिंह के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई थी, क्योंकि उनकी मूली की फसल उनकी आंखो के सामने ही खराब हो रही थी। इसी कश्मकश के बीच साहब सिंह के दिमाग में एक तरकीब आई कि क्यों ना इस पानी को बचाया गया। बस फिर क्या था, खेत मे ही मिट्टी से बांध लगाकर एक बढ़ा गढ्ढा बनाया गया, जिसमें पानी इकठ्ठा हो गया। उसमें एक सबमर्सीबल व पाईप लगाकर खेत में ही स्थित एक पुराने व सूखे कुंए में डाल दिया गया। देखते-देखते बड़ी तेजी से पानी कुंए में जाने लगा और तीन-चार दिन के अंदर ही पानी में डूबी करीब 6 एकड़ में लगी फसल को बचा लिया गया।
किसान साहब सिंह के इस तरीके को देखने के लिए इलाके के किसानो के साथ इन्द्री के एसडीएम सुमित सिहाग, उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य, जिला बागवानी अधिकारी मदनलाल, नाबार्ड के डीडीएम अभिमन्यु मलिक तथा इंडो इजरायिल फार्म लाडवा से डॉ. पवन शर्मा व जल प्राधिकरण हरियाणा के सदस्य तेजिन्द्र सिंह तेजी ने जैनपुर साधान का दौरा किया और किसान के जल संचयन के तरीके को देखकर उसकी सराहना की। साहब सिंह ने इन अधिकारियों को बताया कि यह तो अपनी फसल को बचाने के लिए उनके दिमाग में यकायक आई एक तरकीब थी, जिसमें एक कुंए की मदद ली गई, लेकिन भविष्य में वर्षा जल को संचित कर उसे खेती में प्रयोग के लिए उन्होंने खेत में ही रिजरवायर यानि बड़ा जलाश्य बनाने की ठान ली है और इस पर वे जल्द ही काम शुरू कर रहे हैं। क्योंकि हर साल वर्षा के दिनो में आसमान से बरसने वाले व आस-पास के खेतों से आने वाला पानी या तो फसल खराब करता है या बहकर आगे चल जाता है, यानि किसी प्रयोग में नहीं आता। अब ऐसे पानी को प्रयोग में लिया जाएगा, इससे असीमित लीटर भूमिगत जल की बचत के साथ-साथ पावर यानि ऊर्जा की भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि दूसरे किसानो को भी ऐसा करने के लिए सोचना चाहिए।
किसान साहब सिंह ने अपने खेत मेें आए अधिकारियों को नेट हाऊस में लगाई लहलहाती गुलाब की खेती का भी भ्रमण करवाया और बताया कि वे पिछले कई साल से करीब साढे 4 एकड़ में आस्ट्रेलियन किस्म के गुलाब तथा इतनी ही भूमि में शिमला मिर्च व खीरा की फसल सफलतापूर्वक ले रहे हैं। यह अधिक पानी लेने वाली धान की फसल का बेहतर विकल्प है।
फोटो कैप्शन: प्रगतिशील किसान साहब सिंह के खेत में वर्षा जल के पुर्नभरण की तरकीब को देखते इन्द्री क्षेत्र के किसान।
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