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एनडीआरआई में तीन दिवसीय ग्लोबल एलुमनी साइंटिफिक मीट का शुभारंभ

करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में गुरुवार को तीन दिवसीय ग्लोबल एलुमनी साइंटिफिक मीट का शुभारंभ हो गया। इस शिखर सम्मेलन में विविध क्षेत्रों के प्रबुद्ध डेरी उद्यमियों, बिजनेस लीडर तथा जिस व्यक्ति यानि इंजीनियर सोनम वांगचुक (फुंगसुंग वांगडू) पर थ्री इडियट्स फिल्म बनी थी, उन्होंने इस मीट में भाग लिया और अपने अनुभवों को विद्यार्थियों के साझा किया। इनके अलावा देश के विभिन्न क्षेत्र में बड़े औद्यो पर कार्यरत एनडीआरआई पूर्व विद्यार्थियों ने भविष्य के अवसरों की कल्पना करने और सफलता के मार्ग को आगे बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। इस प्रतिष्ठित संस्थान में उद्यमिता और स्टार्ट अप इकोसिस्टम कैसे बनाया जा सकता है, इस बात पर मंथन किया गया। उद्घाटन समारोह में डॉ. हर्ष कुमार भानवाला, अध्यक्ष, नाबार्ड ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और एसएस मान, संस्थापक एवं अध्यक्ष, मान वेंचर्स वशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. हर्ष कुमार भानवाला ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन आज प्रधानता के मान्य बदल गए हैं, क्योंकि देश की जीडीपी में कृषि का योगदान कम होता जा रहा है और एग्रीकल्चर जीडीपी मेंं डेरी का योगदान बढ़ा है। भारत ने विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादकता में विशिष्ट पहचान को हासिल किया है। वर्तमान में भारत दूध सहित मसाले, दाले तथा चाय उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, वहीं चावल, कपास, अनाज तथा फ्रूट में दूसरे स्थान पर है। भारत एग्रो कैमिकल्स में चौथे स्थान पर है।

ह्यडा. भानवाला ने उद्यमिता और स्टार्ट अप इकोसिस्टम पर बोलते हुए कहा कि उद्यमी मात्र आमदनी कमाने के लिए नहीं बल्कि जन सेवा करने के लिए होता है। इससे आप बहुत से लोगों को रोजगार का साधन उपलब्ध करवा सकते हो। लेकिन उद्यमी बनने में काफी रिस्क भी उठाना पड़ता है, जो इस रिस्क को पार कर जाता है, वह सफल हो जाता है। उन्होंने डेरी उद्यमी बनने में बहुत से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे पशुओं में लॉ प्रोडक्टिविटी, छोटी जोत, प्रसंस्करण सिस्टम का कमजोर होना और दिन प्रतिदिन बढ़ती जनसंख्या, अच्छी लेबर न मिलना, पर्यावरण परिवर्तन तथा सही प्रोडक्ट के लिए सही मार्किट उपलब्ध न होना। जिसे नए अनुसंधानों के द्वारा दूर करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि उच्च उत्पादकता वाले डेरी पशुओं की उपलब्धता से नव युवा पीढ़ी को डेरी क्षेत्र को एक उद्यम के रूप में अपनाने की प्रेरणा भी मिलेगी। इससे देश के किसानों को अपनी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता भी मिलेगी।

वहीं उन्होंने वल्यू चेन सिस्टम में भी सुधार करने के बात पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए देश में हर वर्ष 200 से 300 स्टार्ट-अप शुरू करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले फंडिंग मैनेजमेंट, मार्गदर्शन, अच्छा रिसर्चर तथा त्याग की भावना का होना जरूरी है।
अंत में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिंदगी में एक ही बार मौका मिलता है, उस मौके को पहचानो और जो काम आप करना चाहते हैं, उसे सही पर करें, क्योंकि देरी से लिया गया निर्णय नहीं के बराबर ही होता है। अगर आपके मन में उद्यमी बनने का जज्बा है, तो आप जरूर कामयाब होंगे।
एनडीआरआई के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने कहा कि इस मीट का मुख्य उद्ेश्य विद्यार्थियों में उद्यमी बनने की भावना पैदा करना है। इसके लिए उन्होंने इस मीट में देश की नामी हस्तियों को बुलाया है, जिन्होंने उद्यमी बनकर बुलंदियों को छू लिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्थान में ऐसी व्यवस्था बनाने है, जो हमारे विद्यार्थियों में कहीं नौकरी न करके उद्यमी बनें। बढ़ती अर्थव्यवस्था में पशुपालन का योगदान बढ़ता जा रहा है, जिससे उद्यमी बनने के अवसर ज्यादा पैदा होंगे।
इस अवसर पर सोनम वांगचुक स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीओएमएल) के संस्थापक-निदेशक, एसएस मान, संस्थापक और अध्यक्ष, मान वेंचर्स, डॉ. आरटी रवि, अध्यक्ष और संस्थापक, क्रेब्स इंडस्ट्रीज लि, आनंद कुमार, संस्थापक, सुपर 30, रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमैटिक्स, अनिल भसीन, सीईओ हैवेल्स तथा डा. पी रामाशंकर सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपनी जिंदगी के बहुमूल्य अनुभव व सुझाव विद्यार्थियों के साथ सांझा किए। इस अवसर संयुक्त निदेशक अनुसंधान डा. लता सबीखी, कार्यक्रम समन्यवक डा. गौतम कौल सहित अन्य वैज्ञानिकगण मौजूद रहे।

प्रैक्टिकल चीजे जिंदगी में हमेशा याद रहती हैं : सोनम वांगचुक
जिस व्यक्ति यानि इंजीनियर सोनम वांगचुक (फुंगसुंग वांगडू) पर थ्री इडियट्स फिल्म बनी थी और वॉलीवुड अभिनेता आमिर खान से जिनका किरदार निभाया था, उन्होंने एनडीआरआई में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और विद्यार्थियों को जीवन में किताबी ज्ञान पर निर्भर न रहकर प्रैक्टिकल करने का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज को रटना नहीं चाहिए, बल्कि उसे प्रैक्टिकली करके देखना चाहिए। प्रैक्टिकल चीजे जिंदगी में हमेशा याद रहती हैं। उन्होंने कहा कि जो संसाधन हमारे पास उपलब्ध हैं, उनका सही प्रयोग करते हुए कुछ ऐसे अविष्कार करने की जरूरत हैं, जिनसे देशवासियों का भला हो सके। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों में ज्ञान और क्षमता की कमी नहीं है, लेकिन वो अपने ज्ञान का इस्तेमाल अपने देश के लिए करें। काबिले गौर है कि सोनम वांगचुक स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीओएमएल) के संस्थापक-निदेशक भी हैं। फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान का किरदार फुंगसुक वांगडू, सोनम वांगचुक की जिंदगी से प्रेरित था। इन्हें देश एवं विदेश में विभिन्न पुरस्कारों द्वारा नवाजा जा चुका है।

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