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कम लागत प्राकृतिक कृषि किसानों के लिए वरदान: कुलवन्त सैनी

कुरुक्षेत्र, 28 जून 2019: कम लागत प्राकृतिक खेती किसानों के लिए वरदान है, खेती की इस परम्परागत तकनीक को अपनाकर किसान न केवल अधिक उत्पादन ले सकता है बल्कि इससे भूमि की उर्वरा शक्ति, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण के साथ गो संरक्षण का पुण्य भी प्राप्त होता है। उक्त शब्द आज प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी ने कहे। उन्होंने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र पिछले लगभग 12 वर्षों से कम लागत प्राकृतिक खेती कर रहा है जो पूरी तरह से सफल भी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यदि किसान पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना चाहता है तो उसके लिए एकमात्र उपाय कम लागत प्राकृतिक खेती ही है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल के सभी उत्पाद 100 प्रतिशत शुद्ध एवं जहरमुक्त है और उत्तराखण्ड स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (न्ैव्ब्।) से प्रमाणित हैं।

कुलवन्त सैनी ने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र के संरक्षक एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी ने पद्मश्री सुभाष पालेकर जी के मार्गदर्शन में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के 180 एकड़ कृषि फार्म पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। वर्तमान में गुरुकुल का यह 180 एकड़ का कृषि फार्म पूरी तरह से प्राकृतिक खेती को समर्पित है और अब यहाँ पर गेहूँ, धान, मक्का, चना, मूंग, गन्ना के अलावा आलू, बैंगन, मिर्च, गोभी, मटर, लौकी, तौरी, टमाटर, मूली, शलजम, अरवी, प्याज, लहसुन, चप्पल कद्दू, नींबू, हरा धनिया, पुदीना आदि हरी सब्जियों व फलों में अमरूद, अखरोट, पपीता, बेर, लीची, खरबूजा, मतीरा आदि की जहरमुक्त एवं प्राकृतिक खेती की जा रही है।

उन्होंने बताया कि गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म के सभी उत्पादों को उचित मूल्य पर लोगों तक पहुंचाने के लिए गुरुकुल कुरुक्षेत्र के ठीक सामने बिक्री केन्द्र स्थापित किया गया है जहाँ पर गुरुकुल का प्राकृतिक गुड़, शक्कर, देशी खाण्ड, राब, चावल, गेहूं, गन्ने का रस, शहद, दलिया व अन्य उत्पाद उलब्ध हैं। कुलवन्त सैनी ने बताया कि कम लागत प्राकृतिक खेती में गन्ने की खेती में एक बार गन्ने की बुवाई के बाद 10-15 वर्षों तक दोबारा गन्ना बोने की जरूरत नहीं पड़ती। इतना ही नहीं बुआई के समय बीज भी बहुत कम लगता है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से किसानांे से अनुरोध किया है कि रासायनिक खेती को छोड़कर कम लागत प्राकृतिक खेती को अपनाएं। कम लागत प्राकृतिक खेती से संबंधित किसी भी समस्या के लिए कोई भी किसान गुरुकुल कुरुक्षेत्र में सम्पर्क कर सकता है, यहाँ पर प्राकृतिक खेती की पूरी ट्रेनिग निःशुल्क प्रदान की जाती है और फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन के लिए गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म का किसान भाई दौरा कर सकते हैं।

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