करनाल 22 जनवरी, भा.कृ.अनु.प.-गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र, करनाल में छ: दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘कृषक आय हेतु गन्ना खेती की वैज्ञानिक पद्धति’ का समापन समारोह आयोजित किया गया। जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश के आठ जिलों से आये 22 प्रगतिशील गन्ना किसानों ने भाग लिया। मंच का संचालन डॉ. एस.के. पाण्डेय द्वारा किया गया। सरस्वती वंदना के पश्चात इस अवसर पर पाठ्यक्रम निदेशक एवं संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नीरज कुलश्रेष्ठ ने केन्द्र की उपलब्धियों के बारे में सबको अवगत करवाया। इसके उपरांत केंद्र के अध्यक्ष द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. बक्शी राम, निदेशक, गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बतूर का स्वागत किया तथा सभागार में उपस्थित सभी कृषकों को गन्ने में उनके अतुलनीय योगदान के बारे में अवगत कराया। उन्होंने अधिक उत्पादन व चीनी मिलों में चीनी परता में सकारात्मक वृद्धि में को 0238 किस्म के योगदान की सराहना की तथा किसानों को नवीनतम गन्ना प्रौद्योगिकी के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
डा0 नीरज कुलश्रेष्ठ ने संस्थान की उन्नतशील प्रजातियों जैसे को.0118, को.0237, को.0239, को. 98014, को.06034, को. 09022 एवं को.12029 के बारे में जानकारी दी जिससे किसान लाभान्वित हो सकें। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि चौड़ी पंक्ति बिजाई की रोपण विधि अपनाकर अधिक गन्ना उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके उपरांत मुख्य अतिथि डॉ. बक्शी राम ने सभागार में उपस्थित सभी किसानों को संबोधित करते हुए सभी कृषकों का स्वागत किया तथा बताया कि पिछले वर्ष हमारे देश का चीनी उत्पादन 7-8 मिलियन टन अधिक हुआ जिसमें गन्ना प्रजाति को.0238 की मुख्य भूमिका रही। भारतवर्ष में गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बतूर द्वारा विकसित गन्ना किस्मों के अंतर्गत 89 प्रतिशत क्षेत्र आता है जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने बताया कि गन्ने का पूरे देश में उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत 60 प्रतिशत एवं उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत 40 प्रतिशत क्षेत्र आता है। उन्होंने बताया कि गन्ना उत्पादन में उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत 58 प्रतिशत एवं उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत 42 प्रतिशत योगदान है। उत्तर भारत में को.0238 के अंतर्गत 22.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र आता है जोकि इस किस्म द्वारा प्राप्त की गयी सबसे बड़ी उपलब्धि है जिससे किसानों की उपज एवं चीनी परता में आशातीत वृद्धि हुई। उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र के अंतर्गत को. 0238 का क्षेत्र कुल गन्ने के क्षेत्रफल का लगभग 66.5 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित को. किस्मों के अंतर्गत उत्तर भारत का 73.25 प्रतिशत क्षेत्र अधिकृत है। उन्होंने किसानों को स्वस्थ बीज कार्यक्रम के बारे में बताया कि गन्ने का बीज उपचार करके गन्ने का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डा0 एस0 के0 पांडेय0, डा0 एम0 एल0 छाबड़ा, डा0 रवीन्द्र कुमार, डा0 एम0 आर0 मीणा, डॉ. पूजा एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
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