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खाद्य पदार्थ की गुणवता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नई तकनीकें विकसित करने की जरूरत: डा. वासुदेवप्पा

करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में नैनो टेक्नोलॉजी और बायोकेमिकल्स तकनीक द्वारा दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा का मूल्यांकन विषय पर चल रही 21 दिवसीय काफ्ट (सेंटर फॉर एडवांस फैकल्टी ट्रेनिंग) ट्रेनिंग प्रोग्राम का समापन हो गया। राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, सोनीपत (निफ्टिम) के कुलपति डॉ. सी. वासुदेवप्पा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और संस्थान के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
डा. सी. वासुदेवप्पा ने कहा कि देश आज दूध उत्पादन में प्रथम और फल-सब्जी उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है, जबकि मछली उत्पादन में तीसरे और अंडा उत्पादन में पांचवें स्थान पर है। भारत लगभग वर्ष में 800 मीट्रिक टन खाद्य उत्पादन करता है। संसाधानों की कमी के कारण खाद्य पदार्थ खराब हो जाते हैं। ऐसे में हमें ऐसी सस्ती एवं किफायती तकनीकें विकसित करने की जरूरत है, जिससे खाद्य पदार्थ की गुणवता और सुरक्षा बनी रहे। इन तकनीकों में नैनो टेक्नोलोजी भी अहम भूमिका निभा सकती है। डा. वासुदेवप्पा ने कहा कि भारत में लगभग 70 प्रतिशत फूड सेक्टर असंगठित है, अगर से संगठित किया जाए तो देश में कोई व्यक्ति भूखे पेट नहीं सोएगा। निश्चित रूप से यह ट्रेनिंग कार्यक्रम वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के ज्ञान को नवीनतम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डा. आरआरबी सिंह ने कहा कि विश्लेषणात्मक उपकरणों ने खाद्य पदार्थों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि (सेंटर फॉर एडवांस फैकल्टी ट्रेनिंग) काफ्ट ने पिछले दो दशक में डेयरी और पशु विज्ञान शिक्षा प्रदान करने वाले लगभग सभी विश्वविद्यालयों में प्रशिक्षिण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। निश्चित रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं में आवश्यक जनशक्ति को तैैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
संयुक्त निदेशक डा. बिमलेश मान ने बताया कि इस ट्रेनिंग में प्रतिभागियों को संस्थान द्वारा विकसित की गई तकनीकों के बारे में अवगत करवाया गया। पाठ्यक्रम के डायरेक्टर डॉ. रमन सेठ ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, केरल, असम सहित 12 राज्यों के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में कार्यरत 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। 21 दिवसीय ट्रेनिंग के दौरान 50 व्याख्यान व 15 प्रेक्टिकल करवाए गए।
डॉ. कमल गांधी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।  इस मौके पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अपने अनुभव सांझा किए। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक (प्रशासन) सुशांत साहा, डा. राजन शर्मा, डा. गौतम कौल, डा. राजेश कुमार, डा. कमल गांधी,  सहित अन्य वैज्ञानिक एवं विद्यार्थीगण मौजूद रहे।

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