कुरुक्षेत्र 11 सितम्बर: जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी यशबीर सिंह ने कहा कि खिलाडिय़ों को तंदरुस्त रहने और अपने पदर्शन को बेहतर बनाने के लिए संतुलित और पोष्टिïक आहार लेने की जरुरत है, जो खिलाड़ी नियमित रुप से संतुलित आहार नहीं लेगा, उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़़ सकता है। इतना ही नहीं संतुलित और पोष्टिïक आहार के लिए डाईटिशियन से भी समय-समय पर सलाह लेनी चाहिए।
वे बुधवार को द्रोणाचार्य स्टेडियम में जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वाधान में राष्टï्रीय पोषण माह के अवसर पर आयोजित पोषण दौड़ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इससे पहले डीएसओ यशबीर सिंह, साई इंचार्ज गुरविन्द्र सिंह व महिला एवं बाल विकास विभाग से डाईटिशियन एवं जिला कार्यक्रम संयोजक ज्योति ने पोषण दौड़ को हरी झंडी देकर रवाना किया। डीएसओ ने कहा कि जिला कुरुक्षेत्र में एक सितम्बर से लेकर 30 सितम्बर तक राष्टï्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान युवा पीढ़ी और बच्चों को संतुलित और पोष्टिïक आहार लेने के बारे में जागरुक किया जाएगा। इसी उदेश्य को लेकर ही पोषण दौड़ का आयोजन किया गया। इस दौड़ा में सैंकड़ों खिलाडिय़ों ने भाग लिया और हाथों में पोषण आहार से सम्बन्धित पोस्टर उठाकर लोगों को जागरुक किया।
जिला कार्यक्रम संयोजक ज्योति ने कहा कि उपायुक्त डा. एसएस फुलिया के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र जिले में राष्टï्रीय पोषण माह को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 30 सितंबर तक चलने वाले अभियान को 5 थीम पर संचालित किया जाएगा। इसमें नवजात शिशु की जन्म से लेकर पहले 1000 दिन तक देखभाल, ऊपरी पूरक आहार, दस्त से बचाव, एनीमिया की रोकथाम और स्वच्छता को शामिल किया गया है। प्रदेश के हर गांव व शहर में इसी थीम पर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर वरिष्ठï प्रशिक्षक जयभगवान, जितेन्द्र, पूनम शर्मा, पंकज परासर, संतोष पासवान, सोहन लाल, शिव कुमार, हरप्रीत सिंह, अरुण व अन्य प्रशिक्षक उपस्थित थे।
पोषण माह में होंगी ये गतिविधियां
पोषण माह के दौरान पहले सप्ताह में पुरुष भागीदारी, दूसरे में किशोरी, तीसरे में बाल और चौथे में माता सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। पूरे महीने आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर दिन अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें वजन, सुपोषण, पंचायत मीटिंग, ऊपरी आहार, पोषण वाटिका, आंगनबाड़ी केंद्र सुदृढ़ीकरण, सुपोषण स्वास्थ्य मेला व झांकी, सुपोषण गूंज, रैली, पुष्टाहार से निर्मित व्यंजन बनाने की विधि का प्रदर्शन, प्रभातफेरी, बाल सुपोषण उत्सव, गोदभराई व अन्नप्राशन आदि गतिविधियां शामिल हैं।
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