सांस्कृतिक अधिकारी तान्या जी.एस.चैहान के अभिनय के कायल हुए दर्शक: कला इतनी व्यापक है कि विभिन्न विद्वानों की परिभाषाएँ केवल एक विशेष पक्ष को छूकर रह जाती हैं। कला का अर्थ अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है, यद्यपि इसकी हजारों परिभाषाएँ की गयी हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित हो। अभिनय भी कला का ही एक पक्ष है जिसके माध्यम से कलाकार कईं चरित्रों को जीवित कर देता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की सांस्कृतिक अधिकारी तान्या जीएस चैहान के अभिनय में। तान्या चैहान ने स्वदेश दीपक के चर्चित नाटक कालकोठरी के एक अंश को लोगों के सामने अपने अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। एक कलाकार की भूमिका निभाते हुए तान्या चैहान ने रंगकर्मी के दर्द को सबके सामन रखा। वहीं एकल अभिनय में विभिन्न चरित्रों को भी बखूबी निभाया। जातक कथा में प्रसंग सुनाते हुए महात्मा बुध और दुखियारी स्त्री का अभिनय करते हुए तान्या चैहान ने नवरस की झलक अपने किरदार में दिखाई। नाट्य प्रस्तुति में जहां एक ओर तान्या चैहान का अभिनय दमदार था वहीं संवाद अदायगी ने भी दर्शकों को भावविभोर करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। मैक की भरतमुनि रंगशाला में उपस्थित सभी दर्शकों ने तान्या चैहान के अभिनय की सराहना की।
Post Now India Post Now India