पिहोवा 8 फरवरी – देश की प्राचीन सरस्वती नदी के इतिहास को सरस्वती प्रदर्शनी में देखा जा सकता है, इस प्रदर्शनी में सरस्वती नदी के ऐतिहासिक क्षणों को 18 से ज्यादा पैनलों में दर्शाने का अनोखा प्रयास किया गया है। इस हजारों वर्ष पुरानी सरस्वती नदी के इतिहास को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड द्वारा लगाई प्रदर्शनी में 10 फरवरी तक देखा जा सकता है।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्षम प्रशांत भारद्वाज का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती उत्सव के दूसरे दिन विभिन्न विभागों की लगाई गई स्टॉलों में सरस्वती नदी के उदगम स्थल से गुजरात प्रदेश के अहमदाबाद में सरस्वती बांध का दृश्य एवं इसके बाद संगम का दृश्य दर्शाया गया है तथा यह लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। पहले चित्र में सरस्वती का ऋगवेद ग्रंथ में सरस्वती के महत्व का वर्णन उसके बाद यजुर्वेद में सरस्वती के महत्व का वर्णन दर्शाया गया है, जो मानव कल्याण का दर्शनबोद्ध करवाता है। इसके अगले चित्र में ब्रिटिश काल के मानचित्र में सरस्वती का वर्णन तथा हाकरा चैनल इसमें यमुना, सरस्वती, सतलुज का उल्लेख व वर्ष 1874 पेज 101 क्रम 42 गजटेड नोटिफि टेशन बैंगलोर के उल्लेख एवं फोटो प्रति दर्शाती है। पूर्व में सरस्वती का प्रवाह हरियाणा से होकर गुजरता था। सरस्वती नदी के प्रवाह का मानचित्र का मॉडल, विभिन्न स्थानों से गुजरती सरस्वती का प्रवाह दिखाया गया है। एक चित्र में हिसार के राखी गढी गांव में खुदाई में सरस्वती नदी के प्रवाह के सबूत के दृश्य का चित्र इसमें इंटरनल चैनल, जो ओएनजीसी द्वारा लगाया गया है, दिखाया गया है।
उन्होंने कहा कि यमुनानगर के गांव मुगलवाली गांव में कुछ ही फीट की खुदाई पर जल प्रवाह के सबूत का दृश्य ही लोगों को आकर्षित कर रहा हैं। अम्बाला के वर्ष 1892-93 के गजट नोटिफिकेशन की फोटो स्टेट प्रति, जिसमें चित्र में भूगोलिक जलप्रवाह का उल्लेख है। नक्शे में साबित करता है कि यह पौराणिक नदी प्राचीन काल से अपना महत्व रखती है। एक प्राचीन यात्रि द्वारा सिरसा में यात्रा के दौरान लिखा गया है कि यह धान उत्पाद क्षेत्र है और यहां से धान दिल्ली तक भेजा जाता है। इसके उत्पादन में यहां से बह रही सरस्वती का उल्लेख दर्शाता है कि यह नदी हरियाणा की जीवन दायनी नदी है। इसके अलावा सरस्वती जल प्रवाह के उदगम से संगम तक का मॉडल तथा कलायत जिला कैथल में कपिल मुनि, सरोवर में फूटता हिमालय का जल, सरस्वती नदी के जल प्रवाह ही दर्शाता है। जिला हिसार के बनावली गांव में उत्खनित कुआं, जो बहुत की प्राचीन है किसी नदी के तट पर स्थित होने का संकेत देता है। इसके अलावा जींद के राखी गढी में उत्खनन में मिले सबूत या किसी भव्य नदी के जल प्रवाह के संकेत देते हैं। भारतीय ओएनजीसी द्वारा बोरवैल से लगाए गए चित्र से निकलते पानी के चित्र एवं उनके सैम्पल की जांच में किसी नदी जल के प्रवाह के सबूत चित्र में वरबस की इसके प्रवाह के संकेत देते हैं। इसरो के एक चित्र में सरस्वती नदी के भूमिगत प्रवाह का दृष्य एवं फोटो भी दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।
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