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फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर सरकार की स्कीम, इन-सीटू (इन-सॉयल इटसेल्फ यूटिलाईजेशन) यानि फसल अवशेष को कृषि यंत्रों से जमीन मे ही समायोजित करने के प्रयास करनाल जिला मे सफलतापूर्वक हुए है

करनाल 07 अगस्त, फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर सरकार की स्कीम, इन-सीटू (इन-सॉयल इटसेल्फ यूटिलाईजेशन) यानि फसल अवशेष को कृषि यंत्रों से जमीन मे ही समायोजित करने के प्रयास करनाल जिला मे सफलतापूर्वक हुए है। गतवर्ष से लागू यह स्कीम केन्द्र की ओर से उत्तर भारत के हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों के लिए बनाई गई थी, जो दो वर्ष के लिए थी। गतवर्ष इस स्कीम के क्रियान्वयन को लेकर करनाल जिला में 133 कस्टम हायरिंग सैंटर (सीएचसी) बनाए गए थे।

इस वर्ष के लिए बीती 7 जुलाई तक कृषि विभाग के कार्यालय में सीएचसी स्थापित करने के लिए इच्छुक किसानों के समूह, किसानों की सहकारी सोसाइटी, एफ.पी.ओ, स्वयं सहायता रजिस्टर्ड किसान सोसाइटी, महिला किसान समूह या स्वयं सहायता समूह से 160 आवेदन आए हैं। प्रदेश सरकार की और से जिला के उन गांव, जिनमें फसल अवशेषों को आग लगाने के मामले नहीं हुए थे, के लिए आवेदन की अवधि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है, परिणामस्वरूप ऐसे गाँवों की ओर से भी आवेदन आ रहे हैं।

बुधवार को इस स्कीम के लिए गठित जिला स्तरीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने लघु सचिवालय के सभागार में आयोजित एक बैठक में आए कमेटी के सदस्यों को निर्देश दिये कि सीएचसी तथा व्यक्तिगत के मामलों में सब्सिडी सरकार की हिदायत अनुसार ही जारी की जाएं। स्कीम के दिशा निर्देशानुसार पांच एकड़ से नीचे के लघु एवं सीमांत किसानों को सब्सिडी का लाभ देने के लिए वरियता के आधार पर चयन किया जाए, लेकिन इससे बड़े किसान जिन्होंने आवेदन किया है उनके लिए सरकार से क्लेरिफीकेशन ले ली जाए। बैठक मे निर्णय लिया गया कि सीएचसी की फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए, ब्लॅाक एग्रीकल्चर ऑफिसर, ए.डी.ओ तथा बी.डी.पी.ओ की कमेटी बना दी जाए।

उपायुक्त ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से कहा की सरकार की इस स्कीम के फलस्वरूप करनाल जिला में फसल अवशेषों को आग लगाने के मामले काफी कम हुए हैं इसे जीरो लेवल पर लाने के लिए अभी से प्रयास श्ुारू किए जाएं। इसके लिए कृषि विभाग की टीमें गाँव-गाँव में जाकर किसानों को जागरूक करें। उन्होंने बताया की फसल कटाई के बाद खेतो में खड़े फाने अथवा धान अवशेषों को आग लगाने से रोकने के लिए ग्राम पंचायत नम्बरदार, पटवारी व चौकीदार को जिमेवारी दी जाएगी इस के साथ-साथ जिन गाँव में आग लगाने के मामले हुए है वहाँ किसानों को समझाने के लिए एस.डी.एम. की अगवाही में बैठकें कर किसानों को समझाया जाएगा। उन्होंने ये भी बताया की किसानों को इस बात के लिए भी जागरूक किया जाए कि वे एसएमएस यानि सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम मशीन खरीदें।

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