कुरुक्षेत्र 15 दिसम्बर । असम से आए नूर आलम द्वारा बांस की लकड़ी से बने विभिन्न प्रकार के साजो-समान को पर्यटक खुब पसंद कर रहे है। पर्यटकों के लिए बांस की लकड़ी से बने विभिन्न प्रकार के समान धूम मची हुई है | उन्होंने बताया कि वह इस समान को खुद बांस की लकडी से तैयार करता है। इस बांस को वह पहाडी इलाकों से काट कर लाता है। बांस की लकड़ी से मैगजीन बाक्स, बोनस, वाल सीनरी, फलावर बाक्स तथा पौधे लगाने के लिए गमले, डैकोरेशन जंगला, टेबल लैम्प इत्यादि साजो सामान को तैयार करता है।
नूर आलम ने बताया कि वह हर साल अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में आता है और बांस से बने सामान को पर्यटक बहुत पंसद करते है। बांस की लकड़ी से बने की इस महोत्सव में काफी मांग है। उन्होंने कहा कि पहले बांस की फसल से अपने घरों की छत के साथ-साथ डैकोरेशन का सामान भी तैयार करते है। इस तरह का सामान तैयार करने के लिए उसे एक से दो दिन लगते है और यह सामान देखने में प्लास्टिक से बने सामान से बेहतर और सुंदर है। वह बांस से बने डाईनिंग टेबल पर प्रयोग किए जाने वाले ट्रे व प्लेट भी पर्यटकों के लिए खास तौर पर लेकर आए है।
वोलीवुल ऊन से बनी जेकार्ट की शाल और स्टॉल भा रही है पर्यटकों को
उतराखंड से आए राजकुमार ने बताया कि वोलीवुल ऊन से बनी स्टॉल, पंखी, जेकार्ट शाल व मफरल खड्डी का कारोबार करता है और वह हर साल इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में आता है। यह जेकार्ट शाल और स्टॉल गर्म धागे से बनी हुई होती है जो कि ठंडे मौसम में ठंड से बचाने का काम करती है।
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