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बाबा शीलनाथ को हत्या का दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई

कैथल, 11 सितम्बर: जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एम.एम. धोंचक के न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 304-ढ्ढढ्ढ के तहत मांगे राम की हत्या के मामले में चंद्र नाथ के शिष्य एवं जिला के नौच गांव निवासी बाबा शीलनाथ को हत्या का दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 एवं 323 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी व्यक्ति को एक वर्ष अतिरिक्त सामान्य कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय द्वारा इस मामले के अभियुक्त को मात्र 11 दिनों में सजा सुना दी गई।

प्रोसीक्यूशन के बयान के अनुसार गत 26 अप्रैल 2019 को सायं लगभग 7 बजे क्योड़क पुलिस चौकी को टैलीफोन से यह सूचना प्राप्त हुई कि नौच गांव के जंगल के क्षेत्र मे स्थित बाबा मनोहर नाथ की कुटिया में एक व्यक्ति का शव पड़ा है। पुलिस टीम द्वारा मौके पर जाकर शव बरामद कर जांच पड़ताल की गई। मृतक के पुत्र सतीश ने पुलिस के सामने यह बयान दर्ज करवाया कि 26 अप्रैल 2019 को सायं लगभग 6.15 बजे जब उसने अपने पिता को अपने खेतों में नहीं पाया तो, वह नौच गांव में स्थित बाबा मनोहर नाथ की कुटिया में पहुंचा, जो जंगल के क्षेत्र स्थित थी। वहां पर कुटिया एवं झोंपड़ी के मध्य अपने पिता को लेटे हुए पाया। उसने अभियुक्त बाबा शीलनाथ को अपने चिमटे के साथ वहां देखा, जिसने चिल्लाकर यह कहा कि उसने शिकायतकर्ता के पिता की हत्या कर दी है और यदि शिकायतकर्ता अपनी जिन्दगी बचाना चाहता है, तो वह वहां से भाग जाए। उस समय कुटिया में नौच निवासी सुरेश पुत्र पृथ्वी, भूपेंद्र उर्फ भूप्पी पुत्र महेंद्र सिंह तथा अन्य व्यक्ति मौजूद थे।

याचिकाकर्ता ने बताया कि वह कुटिया परिसर से बाहर आया और अपने भाई सुनील को फोन पर इस घटना की सूचना दी। इसके बाद उसका भाई तथा परिवार के अन्य सदस्य घटना स्थल पर पहुंचे, जिन्हें देख कर अभियुक्त शीलनाथ, सुरेश, भूपेंद्र एवं उनके साथी कुटिया से जंगल में भाग गए। इसके उपरांत पुलिस को सूचना दी गई। जांच एजैंसी द्वारा इस मामले में भूपेंद्र उर्फ भूप्पी एवं सुरेश कुमार पुत्र पृथ्वी सिंह को क्लीन चिट दी गई। इसके बाद 26 अगस्त 2019 को यह मामला जिला एवं सत्र न्यायालय में रखा गया तथा न्यायालय द्वारा अभियुक्त को 27 अगस्त को चार्जशीट करते हुए मामले को केवल 11 दिनों में निपटा दिया गया। प्रोसीक्यूशन द्वारा मामले की सुनवाई के दौरान 19 प्रमाणिक दस्तावेज एवं 13 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष द्वारा एक प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया। इस मामले की पैरवी पब्लिक प्रोसिक्यूटर जनक राज ने की।

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