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भारतीय किसान यूनियन जिला करनाल की मासिक मीटिंग किसान भवन में हुई जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष चौ. जय कुंवार जी ने की

भारतीय किसान यूनियन जिला करनाल की मासिक मीटिंग किसान भवन में हुई जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष चौ. जय कुंवार जी ने की। मीटिंग में किसानों की समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया और पिछले साल की गतिविधियों पर भी विचार किया। मुख्य रूप से 1993 में 7 जनवरी को शहीद हुए लखपत व मामचन्द का शहीदी दिवस गांव निसिंग में 7 जनवरी को मनाया जाएगा। यह शहीद बिजली के आंदोलन में मुख्यमंत्री भजनलाल के सामने प्रदर्शन करते हुए पुलिस की गोलियों से शहीद हो गए थे। उनकी याद में हर वर्ष यह मेला लगाया जाता है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य ने कहा है कि पिछले वर्ष का अनुभव खट्टा मीठा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसानों के साथ बर्बरता की। जिस भी संगठन ने किसान आंदोलन के जरिए किसानों की आवाज उठानी की कोशिश की उसको जबरदस्ती लाठी व डंडे के बल पर दबा दिया गया। 23 जनवरी को हरियाणा व राष्ट्र के किसानों ने दिल्ली घेराव का ऐलान किया तो हरियाणा सरकार ने बर्बरता दिखाते हुए कई स्थानों पर लाठीचार्ज की, टै्रक्टरों को तोड़ दिया गया और किसान अगुवाआों को बिना किसी व्यवधान के गिरफ्तार करके झूठे मुकदमें बना दिए गए। उसके बाद दिल्ली घेराव में किसानों पर बार्डर के बाहर ही गोलियां चलाई गई। उनके ट्रैक्टरों को तोड़ दिया गया। किसानों द्वारा अपनी आवाज उठाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। यह कई साल के बाद पहली बार देखने में आया है। इससे किसान रोषस्वरूप हैं। किसानों पर बिजली व पराली जलाने जैसे षडयन्त्र रचकर जुर्माने लगाए गए और मुकदमें दर्ज किए गए। जबकि किसानों द्वारा मिलों में डाले गए गन्ने का पैसा संघर्ष करने के बाद भी अभी तक नहीं दिलवाया गया। जबकि सारी सरकार इसके बारे में आश्वासन दे चुके हैं कि गन्ने का पैसा जल्द दिलवाया जाएगा। नारायणगढ़ मिल में लगभग 26 करोड़ रुपया बकाया व पिकाडली मिल भादसो का सवा 11 करोड़ रुपया अब भी बकाए हैं और सरकार लगातार इसकी अनदेखी कर रही है। यदि किसान थोड़ा सा भी अधिकार के लिए आंदोलन करता है तो किसानों पर मुकदमें बना दिए जाते हैं व उनको मिल का एरिया बांध कर गन्ना डालने के लिए मजबूर किया जाता है। यदि यह मिल पैसे नहीं देते तो किसानों को भी अधिकार दिया जाए कि वो किसी भी मिल में अपना गन्ना डाल दें। सरकार से किसानों ने आज यह मांग की है कि गन्ने की बकाया पैमेंट जल्दी करवाई जाए अन्यथा किसान उग्र हो सकते हैं। पिछला खराब फसलों का मुआवजा अभी तक नहीं दिया गया। आज किसानों ने मीटिंग में मांग की है कि सरकार किसानों के हित की रक्षा करे और उनको भी इस देश के अंदर मान सम्मान से जीने का अधिकार दिया जाए। यदि सरकार किसान विरोधी षडयन्त्रकारी नीति बनाती रहेगी तो किसान इस खेती से मुंह मोड़ कर खेती करना छोड़ देगा और सरकार के लिए इतना भयवह वातावरण पैदा हो जाएगा कि इस देश में भूखमरी फैल जाएगी और लोग सरकार को चैन से सोने नहीं देंगे। सरकार द्वारा डब्ल्यूटीए की बजाए अलग ढंग से समझौते कर रहे हैं जिसमें जीरो प्रतिशत सीमा शुल्क लगाकर बाहर का खाद्यान्न, दूध आदि मंगवाया जा रहा है जिससे भारत के किसान की आर्थिक स्थिति डगमगा जाएगी ओर किसान बेघर होकर कर्जाई होगा। बाहर के देश कुछ दिन तो देश को सस्ता अनाज दे देंगे जब यहां की खेती खत्म हो जाएगी तो फिर वो ही अमेरिका की तरह आपको आंखे दिखाएंगे तो पहले ही सचेत हो जाएं तो अच्छा है और इस समझौते को खत्म करें।
मीटिंग में निम्न मांगों पर विचार किया गया : 1. फसलों के लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिए जाएं। 2. गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2500 रुपये घोषित किया जाए। 3. गन्ने की बकाया राशि जल्दी दिलवाए सरकार और अगले गन्ने की पैमेंट 15 दिन के अन्दर करें। 4. किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए। 5. खराब फसलों का मुआवजा जल्दी दिया जाए। 6. आयुष्मान भारत योजना में किसानों को भी शामिल किया जाए। 7. किसानों की पेंशन कर्मचारी की तर्ज पर लागू की जाए। 8. पुराली जलाने की आड़  में अधिकारियों द्वारा किसानों को जुर्माना व मुकदमा बनाने की धमकियां दी जा रही हैं इसको तुरंत खत्म किया जाए।
आज की मीटिंग में मुख्य रूप चौ. सेवा सिंह आर्य राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, प्रदेशाध्यक्ष जय कुंवार, जीवन सिंह, राजेन्द्र, राजपाल, कुलदीप, नरसिंह, बाबूराम, टेकचन्द जनरल सैक्रेट्री, रघुबीर सिंह, कुलदीप सिंह, जसपाल, बलधीर सिंह, अंग्रेज सिंह, अजमेर सिंह, नेकी राम, प्रदीप सैनी यमुनानगर, भीम सिंह, रणजीत सिंह जाम्बा, माईचन्द कारसा, मलखान सिंह, सुक्खा सिंह, मलूक सिंह आदि किसानों ने भाग लिया।

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