कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मंच उद्घोषक कार्यशाला के दूसरे दिन प्रदेशभर से आए प्रतिभागियों ने हरियाणवी बोली में मंच संचालन के गुर सीखे। विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खण्डेलवाल के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डा. रामेंद्र सिंह बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रुप मेें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफैसर डा. महासिंह पुनिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मैक के क्षेत्रीय निदेशक नागेंद्र शर्मा ने की। कार्यशाला के दूसरे दिन प्रथम सत्र में मुख्यअतिथि डा. रामेंद्र ने सभी को सम्बांेधित करते हुए कहा कि मंच उद्घोषक कार्यक्रम की आत्मा होता है। शब्दों के चयन, अंदाज आदि के साथ मंच उद्घोषक कार्यक्रम के स्तर को निश्चित करता है। कार्यक्रम से पूर्व मंच उद्घोषक ही कार्यक्रम की गरिमा बनाकर रखता है। वहीं डा. महासिंह पुनिया हरियाणवी संस्कृति के बारे में बताते हुए मंच उद्घोषणा के नियमों पर प्रकाश डाला। महासिंह पुनिया ने बताया कि बोलण आले के बिकजा कड़वे बेर अर ना बोलण आले की मिठाई भी रहज्या। जो बातचीत कर सकता है वह मंच संचालन भी कर सकता है। डा. पुनिया ने बताया कि मंच उद्घोषक कार्यक्रम की धुरी होता है, जिसके इर्द-गिर्द पूरा कार्यक्रम चलता है। कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्रशिक्षक रामनिवास ने बताया कि मंच संचालन के लिए सबसे पहले खड़े रहने का ढंग सही होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंच संचालक यदि खूबसूरत ढंग से अपना कार्य करेगा तो कार्यक्रम की गरिमा बनेगी। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणवी भाषा का एक अलग ही प्रभाव रहता है। जिसमें संचालक अपने मन के भावों हल्के अंदाज में भी प्रस्तुत करके दर्शकों पर एक गहरी छाप छोड़ सकता है। रामनिवास ने बताया कि शुरु में अनुभव कम होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है किंतु निरंतर अभ्यास से प्रत्येक चीज सरल हो जाती है। उन्होंने मंच संचालन के लिए हरियाणवी बोली का परिचय देते हुए समझाया। वहंीं मंच उद्घोषणा के प्रभावी तत्व, गुण, वर्गीकरण ,आवश्यकताएं तथा निराकरण पर भी चर्चा की। कार्यशाला के सांयकालीन सत्र में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक महेश्वर शर्मा निरीक्षण हेतु पहुंचे तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासा व विशेषज्ञों के ज्ञान की भरपूर सराहना की। अपने सम्बोंधन में उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया का कभी अंत नहीं होता है। प्रत्येक व्यक्ति को यदि सीखने की ललक है तो वह किसी भी कार्य में महारत हासिल कर सकता है। सायंकालीन सत्र में प्रसिद्ध न्यूज एंकर सोनल दहिया ने अपने अनुभव सांझा किए। मंच उद्घोषक के नाते मन में होने वाले डर को किस प्रकार खत्म किया जाए? इस विषय में भी सोनल दहिया ने चर्चा की। इसके अतिरिक्त संचालन के प्रकार, साहित्य का महत्व तथा मंच संचालन के प्रकारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमें अपनी बोली पर मान होना चाहिए तथा संचालन के दौरान उम्दा ढंग से अपनी बोली में बात कहते हुए उपस्थिति पर छाप छोड़नी चाहिए। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की प्रभारी रेनू हुड्डा, सांस्कृतिक अधिकारी थियेटर तान्या जी.एस.चैहान तथा शिवकुमार ने अतिथियों को शाल व पौधा भेंटकर आभार जताया। वहीं तान्या चैहान ने बताया कि आज कार्यशाला में प्रसिद्ध रेडियो कलाकार जैनेंद्र कुमार मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित रहेंगे। वहीं सांयकालीन सत्र के दौरान कार्यशाला का समापन किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खण्डेलवाल मुख्यअतिथि के रुप में पहुंचेगी।
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