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मकर संक्रांति उमंग उत्साह प्रदान करती है: डॉ. सुरेश मिश्रा

कॉस्मिक एस्ट्रो पिपली(कुरुक्षेत्र) के डायरेक्टर डॉ. सुरेश मिश्रा ने श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली में भक्तों को बताया कि मकर संक्रांति 15 जनवरी 2019 सूर्य का मकर संक्रांति में प्रवेश काल 14 जनवरी 2019 सायं 07 बजकर 50 मिनट, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद हो रहा है, अतः पुण्यकाल और मकर संक्रांति 15 जनवरी को होगा। पुण्यकाल –  15 जनवरी 2019 को प्रातः 07:21 से सायं 05:52 तक रहेगा ।
मकर संक्रांति का शास्त्रीय विवेचन – इस दिन सिंह पर सवार होकर वैश्य के घर में प्रवेश कर रही है। वारनाम व नक्षत्र अनुसार
ध्वांक्षी नामक सक्रांति होने से आने वाला महीना उद्योगपतियों व व्यासायिक लोगों को शुभफलदायक होगी। उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ने से व्यापारिक लेन-देन अधिक होंगे।  यह मास देशद्रोही व अनैतिक कार्य में लिप्त लोगों का पकड़ने व सजा देने वाला सिद्ध होगा। साथ ही उपरोक्त सभी वाहन, अस्त्र-शस्त्र व वस्त्र से संबंधित व्यापारिक प्रतिष्ठानों को संघर्ष लगने के समय बैठे नहीं रहना चाहिए। मेष,वृष, मिथुन,सिंह, कन्या,तुला,कुम्भ राशि वालों के लिये ज्यादा लाभदायक होगी। कर्क,वृश्चिक, मकर,मीन राशि वालों के लिये सन्तोष प्रद रहेगी ।

मकर संक्रांति को महापर्व की भी संज्ञा दी गई है। इस दिन अगर आप दान,ध्यान,स्नान आदि करते हैं तो उसका फल पूरे साल मिलता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। यह बदलाव साल में एक बार आता है। सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है।

मकर संक्रांति पर स्नान और दान का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दिया गया दान इस जन्म के साथ अगले जन्म में करोड़ो़ गुना होकर मिलता है। मान्यता है कि यहां जितने भी दान किए जाते हैं वे अक्षय फल देने वाले होते हैं। महाभारत के अनुसार ‘यह देवताओं की संस्कार की हुई भूमि है। यहां दिया हुआ थोड़ा सा भी दान महान होता है।’

तिल के तेल का दीपक जलाने से संक्रमण नाश

संक्रांति का अर्थ है संक्रमण। इसलिए सूर्य के इस संक्रमण से बचने और मन की शुद्धि के लिए श्रद्धालु संगम तट पर तिल के तेल का दीपक जलाते हैं। मकर संक्रांति पर द्वादश माधव के तीर्थ प्रयाग में भगवान वेणी माधव को प्रमुख तीर्थ के रूप में माना जाता है। इसलिए वेणीमाधव भगवान को दीप दान विशेष रूप से करते हैं।

विशेष दान करने का महत्वपूर्ण योग है ।

मकर संक्रांति पर हवन, अभिषेक, यज्ञ, नदियों में स्नान दान का बहुत महत्व है। इस अवसर पर खिचड़ी, तिल, गुड़, चावल, नीबू, मूली, उड़द दाल और द्रव्य का दान करना चाहिए। इस दिन सूर्य को आराध्य मानकर पितरों को भी तिल, वस्त्र आदि का दान करना पुण्यकारी होता है।

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