कुरुक्षेत्र 14 जून: उपायुक्त डा. एसएस फुलिया ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वन स्टॉप सेंटर (सखी)की स्थापना की गई है। यह सेंटर उन पीडि़त महिलाओं व बच्चों के लिए कार्य करता है जो कि आसपास के समाज में फैली कूरीतियों व बुराईयों द्वारा पैदा होने वाले हिंसात्मक घटनाओं का शिकार है। जिले में यह सेंटर सेक्टर 13 स्थित कामकाजी महिला आवासीय हॉस्टल में चल रहा है तथा यह सेंटर जिले में अक्टूबर 2018 में खुला था और इसमें अब तक 2 मामले आए है, जिनका समाधान किया गया है।
उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2015 में हरियाणा में 5 जिलों में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई थी, इन 5 जिलों में करनाल, भिवानी, फरीदाबाद, नारनौल व चरखी दादरी शामिल थे। वर्ष 2018 में 15 जिलों में वन स्टाप सेंटरों की स्थापना की गई, जिसमें कुरुक्षेत्र जिला भी शामिल है। जिले के वन स्टाप सेंटर में दो कर्मचारी कार्यरत है तथा यह सेंटर 24 घंटे कार्य करता है। इस सेंटर में घरेलू हिंसा, पुलिस हेल्प, कानूनी सहायता, 5 दिन तक रहना, खाना, मेडिकल सहायता, मनोवैज्ञानिक सहायता तथा आपातकालीन रिस्पांस से सम्बन्धित सभी प्रकार की सुविधाए उपलब्ध करवाई जाती है। डीसी ने बताया कि इस योजना के साथ इस योजना के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग अनेक ऐसी योजनाओं व परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। जिले में जब से यह केन्द्र खुला है, तब से दो मामलों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें एक मामला असम का व एक मामला पंजाब का शामिल था।
इस संदर्भ में जिला कार्यक्रम अधिकारी नीना कपूर ने बताया कि वन स्टाप सेंटर में केन्द्र प्रबंधिका के रुप में शैलजा सैनी कार्य कर रही है, जबकि साईको सोशल कांउसलर गुरप्रीत कौर है। उन्होंने बताया कि सेंटर में जब भी कोई महिला आती है तो वह काफी घबराई हुई होती है, सेंटर में आने के बाद स्टाफ के सदस्यों द्वारा उसकी कांउसलिंग की जाती है जिसके तहत वह अपनी आपबीती सुनाती है। उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं कामकाज के लिए अपने परिवार की सहमति सेे दूसरे प्रदेशों में आ जाती है, लेकिन जब उन्हें अनुभव होता है कि उनका गलत फायदा उठाया जा रहा है तो वह उनके चंगुल से जैसे-तैसे निकल जाती है। मामला जब वन स्टाप सेंटर में आता है तो उनकी काउंसलिंग होती है, तो सम्बन्धित प्रार्थी को यह आभास होता है कि परिवार व शिक्षा कितनी जरुरी है। सम्बन्धित मामलों को सूझबूझ के साथ निपटाया जाता है तथा सम्बन्धित पीडि़ता को उसके घर वापिस भेजा जाता है।
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