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रामायण सनातन परंपरा का ग्रंथ है: प्रामाशिव्यम पिल्लै वयापरे

कुरुक्षेत्र 4 जून रामायण सनातन परंपरा का ग्रंथ है। रामायण आदिकाल से संपूर्ण विश्व को सत्य, अहिंसा और विश्व बंधुत्व की शिक्षा देता रहा है। रामायण मानव जीवन का आदर्श है। रामायण मानवीय जीवन मूल्य का ग्रंथ है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ श्रीप्रकाश मिश्र के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल के मॉरीशस प्रवास के दौरान मॉरीशस के महामहिम राष्ट्रपति प्रामाशिव्यम पिल्लै वयापरे ने राष्ट्रपति भवन, मॉरीशस गणराज्य में शिष्टाचार मुलाकात के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा रामायण मानवता का परिचायक है। रामायण की महत्ता पूरे विश्व में है। यह कालजयी ग्रंथ शिक्षाप्रद है और सांस्कृतिक दिग्दर्शन कराता है। रामायण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक महत्व है। राष्ट्रपति मॉरीशस ने कहा मॉरीशस पर रामायण की अमिट छाप है। मॉरीशस के लोकजीवन में रामायण समाहित है। रामायण की प्रेरणा ने मॉरीशस के स्वतंत्रता आंदोलन में बहुमूल्य भूमिका है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने मातृभूमि सेवा मिशन के सेवा कार्यों की प्रसंशा एवं सराहना की। गोरतलब है कि मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा मॉरिशस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन कि रूप रेखा के लिए मॉरिशस प्रवास पर है | सम्मलेन आगामी 26 सितंबर से 2 अक्टुबर तक है | महामहिम ने रामायण सम्मेलन में रुचि प्रकट करते हुए कहा कि मॉरीशस की ओर से हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। मातृभूमि सेवा मिशन के प्रमुख डॉ0० श्रीप्रकाश मिश्र ने महामहिम राष्ट्रपति को सम्मान स्वरूप प्रतीक चिन्ह, अंगवस्त्रम, गंगा जल, रुद्राक्ष की माला, सुंदरकांड की प्रति, श्रीमद्भगवद्गीता और मिशन का साहित्य भेंट किया।

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