कुरुक्षेत्र, 29 दिसंबर। भारतीय शास्त्रीय संगीत में इस्तेमाल किए जाने वाले वाद्ययंत्रों को लेकर रागगीरी के सालाना कैलेंडर का विमोचन आज विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में किया गया। इस ख़ास कैलेंडर में सितार, तबला, बाँसुरी, वॉयलिन, सारंगी, हारमोनियम, संतूर जैसे वाद्ययंत्रों के बारे में दिलचस्प जानकारी है। इसके अलावा इन वाद्ययंत्रों से जुड़े दिग्गज कलाकारों की तस्वीरों को शामिल किया गया है। उत्तर भारतीय संगीत के साथ साथ दक्षिण भारतीय संगीत में प्रयोग किए जाने वाले वाद्ययंत्र घटम, मृदंगम जैसे कई वाद्ययंत्र इस कैलेंडर का हिस्सा हैं। कैलेंडर का विमोचन विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. रामेंद्र सिंह, हरियाणा साहित्य अकादमी की निदेशक डॉ. कुमुद बंसल और रागगीरी के संचालक शिवेंद्र कुमार सिंह ने किया।
इस मौक़े पर डॉ. रामेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संगीत का बड़ा महत्व है। आज की युवा पीढ़ी को अपने महान कलाकारों से परिचित कराने का ये अनूठा प्रयास है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत में हमारे देश ने एक से बढ़कर एक दिग्गज कलाकारों को जन्म दिया है जिन्होंने पूरी दुनिया में हमारी अलग पहचान बनाई है। ये कैलेंडर उन महान विभूतियों के लिए श्रद्धांजलि है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा के लिहाज से भी इस कैलेंडर को महत्वपूर्ण बताया।
इस मौक़े पर हरियाणा साहित्य अकादमी की निदेशक डॉ. कुमुद बंसल ने कहा कि कई बार ऐसा होता है जब किसी एक विधा के कलाकार का क़द इतना बड़ा हो जाता है कि उस विधा के बाकी कलाकारों को लोग कम ही जान पाते हैं लेकिन रागगीरी ने लगभग सभी दिग्गज कलाकारों को कैलेंडर में शामिल कर समग्रता का अहसास दिया है।
रागगीरी के संचालक संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह लगातार चौथा साल है जब रागगीरी ने शास्त्रीय संगीत पर आधारित कैलेंडर प्रकाशित किया है। इससे पहले संस्था शास्त्रीय संगीत के घरानों, नृतकों और गायकों पर भी कैलेंडर प्रकाशित कर चुकी है। रागगीरी एक रजिस्टर्ड ट्रस्ट है जो कई सालों से शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार में कार्यरत है। इसके अलावा ये संस्था स्कूली बच्चों में शास्त्रीय संगीत के प्रचार प्रसार के लिये “सुनेंगे तभी तो सीखेंगे” कार्यशालाएँ पूरे देश में आयोजित करती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इस बात की बहुत ज़रूरत है कि हम अपनी संस्कृति को संजोकर रखें। हमारा कैलेंडर इसी दिशा में एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस कैलेंडर का एक मक़सद ये भी है कि बच्चे अपने देश के दिग्गज कलाकारों को जान सकें। इससे पहले रागगीरी कुरुक्षेत्र में भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुकी है।
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