कुरुक्षेत्र 26 दिसम्बर | उधम सिंह एक राष्ट्रवादी भारतीय क्रांतिकारी थे। शहीद ऊधम सिंह समतामूलक समाज के समर्थक थे। वे सर्वधर्म सम्भाव के प्रतीक थे और इसलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर राम मोहम्मद आजाद सिंह रख लिया था, जो भारत के तीन प्रमुख धर्मों का प्रतीक है। यह नाम उन्होंने अपनी कलाई पर भी गुदवा लिया था। उनका सपना था कि देश में सभी को समान अधिकार मिले। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने शहीद ऊधम सिंह की जन्म जयंती के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतमाता के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजों की दासता से मुक्ति दिलवाने में शहीद ऊधम सिंह की साहसिक भूमिका रही है। शहीद उधम सिंह हिन्दू-मुस्लिम एकता के पैरोकार थे। ऊधम सिंह का जीवन उतार चढ़ाव का जीवन था। उनका बाल्यकाल आनाथालय में बीता। 1924 में उधम सिंह गदर पार्टी से जुड़ गए। अमेरिका और कनाडा में रह रहे भारतीयों ने 1913 में इस गदर पार्टी को भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए बनाया था। 13 अप्रैल 1919 के भीषण जालियांवाला बाग हत्याकांड ने शहीद ऊधम सिंह को झकझोर दिया था |
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