कुरुक्षेत्र आध्यात्म प्रेरित स्वयं सेवी संस्थान मातृभूमि सेवा मिशन कुरुक्षेत्र के तत्वाधान में गरीब, जरूरतमंद एवं कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों के सर्वागीण विकास हेतु नि:शुल्क संचालित मातृभूमि शिक्षा मंदिर में 20 19-2 0 वर्ष के प्रवेश के लिए एक प्रवेश परीक्षा का आयोजन 31 मार्च और 7 अप्रैल 2 19 को प्रात: 1 : बजे मिशन के फतुहपुर स्थित आश्रम परिसर में होगी। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने बताया कि इस प्रवेश परीक्षा का उद्देश्य जीवन की आवश्यक मूल सुविधाओं से वंचित बच्चों में छुपी प्रतिभा को तलाशना और तराशना है। ऐसे बच्चों को हर प्रकार से सुशिक्षित कर राष्ट्र की मुख्य धारा से जोडऩा है। ऐसे बच्चों में आपार सामथ्र्य है, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह नारकीय जीवन जीने को मजबूर होते हैं। मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा देश के लगभग सभी 658 कुष्ठ आश्रमों को इस प्रवेश परीक्षा के संदर्भ में पत्र व्यवहार किया गया है और कुरुक्षेत्र जिले के आस-पास के झुग्गी झोपडिय़ों में जीवन यापन करने वाले परिवारों से भी संपर्क किया गया है। शिक्षा, संस्कार, चिकित्सा और भोजन से वंचित बच्चे देश के लिए अभिशाप है। डॉ० श्रीप्रकाश मिश्र ने बताया आज देश में प्रगति के लंबे-चौड़े दावों के बावजूद भारत में बच्चों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। देश के विभिन्न रिपोट्र्स और आंकड़े ऐसे बच्चों के संदर्भ में इसकी भयावह तस्वीर पेश करते हैं। भारत में हर साल अकेले कुपोषण से 1 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है। कोई 1 करोड़ बच्चों को अब तक स्कूल जाना नसीब नहीं है। इसके साथ ही सामाजिक और नैतिक समर्थन के अभाव में स्कूली बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
इसके अलावा खासकर बढ़ते एकल परिवारों की वजह से ऐसे बच्चे साइबर बुलिंग का भी शिकार हो रहे हैं। सेव द चिल्ड्रेन की ओर से विश्व के ऐसे देशों की एक सूची जारी की गई है जहां बचपन सबसे ज्यादा खतरे में है। भारत इस सूची में पड़ोसी देशों म्यांमार, भूटान, श्रीलंका और मालदीव से भी पीछे 116वें स्थान पर है। यह सूचकांक बाल स्वास्थ्य, शिक्षा, मजदूरी, शादी, जन्म और हिंसा समेत आठ पैमानों पर प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में 18 साल से कम उम्र के 444 मिलियन बच्चे हैं। यह देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा है। जनगणना 2 11 के अनुसार, हमारे देश में स्कूल जाने वाली उम्र के 4 बच्चों में से 1 स्कूल से बाहर है। कुल में 99 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर निकल गए हैं। डीआईएसई 14-15 की रिपोर्ट के मुताबिक, हर 1 बच्चों में से केवल 32 बच्चे ही स्कूल की शिक्षा पूरी कर पाते हैं। डीआईएसई 14-15 की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों में से केवल 2 प्रतिशत पूर्ण कक्षा 1 से 12 कक्षा तक की शिक्षा प्रदान करते हैं। जनगणना 20 11 के मुताबिक, भारत में 1.4 करोड़ बाल श्रमिक 7-14 साल के आयु वर्ग में अपने नाम नहीं लिख सकते। इसका मतलब है, उक्त आयु वर्ग के तीन बाल मजदूरों में से एक अनपढ़ है। उन्होंने बताया कि मातृभूमि शिक्षा मंदिर देश के जरूरतमंद बच्चों के लिए एक आशा की किरण है और हर संभव प्रकार से ऐसे बच्चों के सर्वांगीण विकास में विगत अनेक वर्ष से समर्पित है।
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