कुरुक्षेत्र, 13 जून: श्री शिरड़ी सांई मंदिर में वीरवार को सांई भक्तों ने पूजा अर्चना की। कई भक्तों ने मनोकामना पूर्ण होने पर प्रसाद वितरित किया। श्री सांई गाथा सुनाते हुए संघ के अध्यक्ष डा. विजय शर्मा ने कहा कि साईं कहते थे कि किसी का दुख देख कर मन पीडि़त होने लगे, तो समझ जाना चाहिए कि हृदय में करुणा व दया ने जन्म लिया है। क्योंकि बिना करुणा व दया के परोपकार का भाव उत्पन्न नहीं होता। किसी की दीन-हीन स्थिति देख कर जब हृदय द्रवित होने लगे, तब अनायास ही प्रभु की याद आती है। अति दुख, अति प्रेम, अति विषाद और अति हर्ष की अभिव्यक्ति का ही प्राकृति स्वरूप है-आंसू। विरह-वेदना से हृदय का द्रवित हो जाना और नेत्र का आंसुओं से भर जाना स्वाभाविक है, इसी तरह लंबी जुदाई के बाद प्रभु मिलन के समय भी नेत्र प्रेम आाश्रुओं से भीग जाते हैं। दुख सहते-सहते मानव जीवन जब तपती धरती के समान बन जाता है, तब मनुष्य के नेत्रों से अनायास ही प्रेम आश्रुओं की धारा बह निकलती है।
Check Also
स्थानीय नई अनाज मंडी में मनाया गया 71वां गणतंत्र दिवस समारोह, शहीदों को युद्ध स्मारक पर जाकर दी श्रद्धांजलि
करनाल 26 जनवरी। नई अनाज मंडी में 71वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़ी धूमधाम के साथ मनाया …
Post Now India Post Now India