कुरुक्षेत्र, 29 अप्रैल । पटियाला बैंक कालोनी में मनोकामना सिद्घ शिव मंदिर में सोमवार को देव मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में देवी-देवताओं की मूर्तियों का अन्नाधिवास एवं पुष्पाधिवास कराया गया। इससे पूर्व पुजारी पंडित उमेश पाठक एवं ब्राह्मण मंडल ने मुख्य यजमानों विनोद सिंगला परिवार से सर्वदेव पूजन कराया। इस दौरान भक्ति प्रवचनों में कथावाचिका चंद्रप्रभा कौशिक ने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भूतभावन भगवान शंकर दूल्हे के वेश में काफी जच रहे थे। कैलाश पर्वत पर उनके गणों ने शिव का ऐसा श्रृंगार करवाया जो आज तक किसी दूल्हें का नहीं हुआ होगा। सूर्यदेव ने छत्र लगा रखा था तो चंद्र देव मस्तक का मुकुट बनकर उनकी शोभा बढ़ा रहे थे। गंगा-यमुना शिव को सुंदर चंवर डुला रही थी और आठों सिद्धियां उनके आगे नृत्य कर रही थी। भगवान विष्णु तथा इंद्र इत्यादि देव बारात में आगे-आगे चल रहे थे। अनेक रुप धरे शिव के गण अपनी परंपरागत वेशभूषा की वजह से शिव की ससुराल में कौतूहल का विषय बने। हिमवान नगर के निवासियों ने अपने जमाई दूल्हा बाबू बने शिव का स्वागत किया। शर्मीले शिव से माता पार्वती की सखियों ने काफी हंसी ठिठोली की। पार्वती के पिता राजा हिमालय व माता मैना ने शंकर के अद्भुत रुप को देखा।
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